Camera : Meri Tisari Ankh

Autobiography
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Camera : Meri Tisari Ankh
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राधू करमाकर दरअसल राजकपूर के सबसे विश्वस्त सिनेमैटोग्राफ़र थे। ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी उत्कृष्ट फ़िल्मों की उनकी ख़ूबसूरत फ़ोटोग्राफ़ी को आज भी दर्शक उत्सुकता और रोमांच से देखते और सराहते हैं। राधू करमाकर की गणना उस दौर के विश्व के दस महान सिनेमैटोग्राफ़रों में की जाती थी। सोवियत रूस में इनकी कुछ फ़िल्मों को सिनेमैटोग्राफ़ी के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था जिनका फ़्रेम-दर-फ़्रेम विश्लेषण करके सिनेमैटोग्राफ़ी के विद्यार्थी फ़ोटोग्राफ़ी के गुर सीखते थे। यह पुस्तक उसी महान सिनेमैटोग्राफ़र की आत्मकथा है। इसमें मामूली कृषक परिवार से निकलकर भारतीय सिनेमा के सिनेमैटोग्राफ़ी के क्षेत्र में उनके शिखर पर पहुँचने की रोचक यात्रा दर्ज है।

राधू करमाकर के बयान में विलक्षण शालीनता है जो बॉलीवुड की दिखावे और बड़बोली दुनिया से अलग है। इनकी यह शालीनता केवल शब्द-व्यवहार नहीं है, यह उनके निजी व्यक्तित्व का अनिवार्य हिस्सा है। इस आत्मकथा में न तो कोई तेवर है और न ही कोई नाटकीय पैंतरे।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2010
Edition Year 2019, Ed. 2nd
Pages 164p
Translator vinod das
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
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Editorial Review

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Radhu Karmakar

Author: Radhu Karmakar

राधू करमाकर

जन्म : 14 अक्टूबर, 1916 को बांग्लादेश में।

कलकत्ता में सिनेमैटोग्राफ़ी जतीन दास की शागिर्दगी में सीखी। शुरुआत में प्रख्यात सिनेमैटोग्राफ़र नितिन बोस के साथ ‘मिलन’, ‘दृष्टिदान’ और ‘मशाल’ फ़िल्मों की सिनेमैटोग्राफ़ी की। बाद में राजकपूर के साथ आर.के. स्टूडियो से जुड़े। राजकपूर के निर्देशन में ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी क्लासिक फ़िल्मों की सिनेमैटोग्राफ़ी की। फ़िल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ का निर्देशन किया। ‘संगम’, ‘बॉबी’, ‘सत्यं शिवं सुन्दरम्’, ‘लव स्टोरी’, ‘प्रेम रोग’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी लोकप्रिय और सफल फ़िल्मों की फ़ोटोग्राफ़ी के लिए उनको भरपूर सराहना मिली। सिनेमैटोग्राफ़ी के लिए फ़िल्म फेयर पुरस्कार और राष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा कई पुरस्कारों से नवाजे गए।

निधन : 4 अक्टूबर, 1993 को एक सड़क-दुघर्टना में।

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