Bina Munder Ki Chaat

Poetry
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Bina Munder Ki Chaat
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प्रेम रंजन अनिमेष भारतीय लोक की जड़ों में जीवित जिजीविषा के गायक हैं। उनकी कविताएँ हमारे आसपास फैली उन चीज़ों तक पहुँचती हैं जिन्हें हमने अब लगभग देखना बन्द कर दिया है लेकिन इसके बावजूद वे दुनिया को चलाए रखने में अपनी भूमिका निभा रही हैं। ये कविताएँ न किसी बड़े परिवर्तन का आह्वान करती हैं और न ऊँची हाँक लगाकर हमें कुछ ऐसा करने को कहती हैं जो हमें हमारे अतीत से काटकर किसी नए अनोखे संसार में स्थापित कर दे। भले ही वह कितना भी सुन्दर, कितना भी अद्भुत, कितना भी पूरा क्यों न हो। ये कविताएँ हमें अपने इसी अधूरे संसार में रच-बसकर जीने के सूत्र थमाती हैं। इसके दुखों की सुन्दरता, इसके अभावों का मोहक आकर्षण, इसकी विसंगतियों के भीतर छिपी आन्तरिक लय, और हर हाल में मौजूद उम्मीद, वे चीज़ें हैं जिन पर, लगता है कवि को आज के दावों-वादों की बड़बोली दुनिया में सबसे ज़्यादा यक़ीन है। कहने की आवश्यकता नहीं कि यही यक़ीन इस देश का सबसे बड़ा सम्बल आज भी है जब हर तरफ़ क़िस्म-क़िस्म के उद्धारकर्ता अपने-अपने ढंग से अपना-अपना उद्धार कर रहे हैं। ‘किसी बच्चे के कुछ सवाल लिए चला आया हूँ/एक सहपाठी के इम्तिहान कैसे गए जानना चाहता हूँ.../’ (पहली गली); ‘भरी हुई गाड़ी में/कैसे कहाँ रखूँ/टपटप चूता अपना छाता/जो बचाकर यहाँ तक लाया?’ (मनुष्यता); ‘इस विकसित तंत्र में/है नहीं ऐसा जरिया/जो पहुँचा पाए/रास्ते में पड़े एक पाँव के जूते को/उसके संगी तक...मैं ईश्वर को देखना चाहता हूँ इस नन्ही दुनिया में/अपने बड़े पाँव में एक नन्हा जूता पहने/दूसरे की तलाश में...’ (एक पाँव का जूता)।

धीमी आँच पर सिंकती-सेंकती ऐसी अनेक कविता-पंक्तियाँ, अनेक कविताएँ हैं जिन्हें आप उपलब्धियों की तरह हमेशा साथ रखना चाहेंगे। लोकभाव को बहुत गहरे में जीने और पुनर्रचित करनेवाले प्रेम रंजन अनिमेष इस संग्रह में पुन: साबित करते हैं कि लोक-बिम्ब काव्य-प्रविधि मात्र नहीं हैं, वे वैकल्पिक जीवन-दृष्टि के संवाहक हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2017
Edition Year 2017, Ed. 1st
Pages 160p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
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Editorial Review

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Prem Ranjan Animesh

Author: Prem Ranjan Animesh

प्रेम रंजन अनिमेष

जन्म : 1968 (आरा, भोजपुर, बिहार)

शिक्षा : विद्यालय स्तर तक पढ़ाई आरा (जैन स्कूल) में। तदुपरान्त पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (अंग्रेज़ी भाषा एवं साहित्य)।

कविता-संग्रह : ‘मिट्टी के फल’, ‘कोई नया समाचार’, ‘संगत’ और ‘अँधेरे में अंताक्षरी’ प्रकाशित। ‘अच्छे आदमी की कविताएँ’ ईबुक के रूप में वेब पर। अगली कविता पुस्तकें ‘माँ के साथ’ और ‘नींद में नाच’ जल्दी ही आने वाली।

कविता के लिए भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार।

कुछ कहानियाँ भी प्रकाशित पुरस्कृत।

कहानी-संग्रह : ‘लड़की जिसे रोना नहीं आता था’ और उपन्यास : ‘स्त्रीगाथा’, ‘परदे की दुनिया’ एवं ‘नौशीन’ शीघ्र प्रकाश्य।

बच्चों के लिए कविता संग्रह : ‘माँ का जन्मदिन’ और आसमान का सपना’ प्रकाशन की प्रक्रिया में, ‘कच्ची अमिया पकी निबौलियाँ’, ‘कुछ दाने कुछ तिनके’ तथा ‘मीठी नदी का मीठा पानी’ प्रकाश्य।

नोबल पुरस्कार प्राप्त आयरिश कवि सीमस हीनी और अग्रणी अमरीकी कवि विलियम कार्लोस विलियम्स की कविताओं का अनुवाद।

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