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Bhartiya Jelon Men Panch Saal

Author: Mary Tyler
Translator: Anand Swaroop Verma
Edition: 2012, Ed. 4th
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Bhartiya Jelon Men Panch Saal

मेरी इस पुस्तक का उद्देश्य न तो कोई राजनीतिक या सामाजिक शोध प्रस्तुत करना है और न मैं इसे अपना अधिकार या कर्तव्य समझती हूँ कि भारतीय जनता के लिए कोई ऐसे क़ानून अथवा विधि-उल्लेखों द्वारा मार्ग-प्रदर्शन करूँ जिसके आधार पर वे अपने देश की समस्याएँ हल करें। मैं किसी तरह की विशेषज्ञ होने का दावा नहीं करती और ख़ुद को इस लायक़ नहीं समझती कि भारतीय समाज का गहराई से विश्लेषण प्रस्तुत करूँ। मैंने जो कुछ लिखा है वह आपबीती घटनाओं का ब्योरा है तथा उन लोगों द्वारा बताई गई बातें हैं जिनके साथ भारत में मुझे रहने का तथा जिनसे मिलने का अवसर मिला। यह सोचकर मैं गर्व का अनुभव कर रही हूँ कि राधाकृष्ण प्रकाशन ने मेरी इस पुस्तक को हिन्दी में प्रकाशित करने और इस प्रकार भारत के व्यापकतर जनसमुदाय तक पहुँचाने के योग्य समझा। इस पुस्तक में मैंने जो कुछ लिखा है, वह भारतीय पाठकों को काफ़ी हद तक जाना-पहचाना लगेगा क्योंकि इसमें मैंने महज़ अपने अनुभवों का लेखा-जोखा पेश किया है और वह भी ख़ासतौर से ब्रिटिश पाठकों के लिए जिन्हें भारतीय समाज के वास्तविक स्वरूप की जो भी जानकारी है, वह ना के बराबर है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Anand Swaroop Verma
Editor Not Selected
Publication Year 1977
Edition Year 2012, Ed. 4th
Pages 189p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Mary Tyler

Author: Mary Tyler

मेरी टाइलर

स्कूल-​शिक्षक रह चुकी मेरी टाइलर 1970 में ब्रिटेन से भारत आई थीं। उसी साल उन्होंने कोलकाता में वामपन्थी कार्यकर्ता अमलेन्दु सेन से विवाह किया। मूलत: बंगाल के रहनेवाले अमलेन्दु उस समय जर्मनी से आगन्तुक वीजा पर भारत आए हुए थे। किसान मोर्चे से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियों को आधार बनाकर मेरी को गिरफ्तार कर लिया गया और बिना किसी सुनवाई के उन्हें पाँच साल की सजा सुनाई गई। उस समय उनकी उम्र 27 साल थी। उन्होंने हजारीबाग सेंट्रल जेल (बिहार) में पाँच साल की सजा काटी। रिहाई के बाद वे ब्रिटेन चली गईं। जेल के अपने अनुभवों को उन्होंने अपनी किताब ‘My Years in An Indian Prison’ में दर्ज किया। उनकी इसी किताब का अनुवाद है—‘भारतीय जेलों में पाँच साल’।

मेरी ब्रिटेन में रहती हैं और मानवाधिकार सम्बन्धी मुद्दों पर कार्यरत हैं।

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