Bharat Ke Vikas Ki Samasyan Aur Samadhan

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Bharat Ke Vikas Ki Samasyan Aur Samadhan

‘भारत के विकास की समस्याएँ और समाधान’ राष्ट्र की ज्वलन्त समस्याओं पर लेखों का संग्रह है। इसमें जीवन, समाज एवं प्रबन्धन के उन सभी आयामों को स्पर्श किया गया है जो विकास के अपरिहार्य अंश हैं। यह पुस्तक अपने में सम्पूर्ण है तथा भारत के लिए उन ठोस उपायों का पथ-प्रदर्शन करती है जिनके आधार पर वर्तमान विषम परिस्थितियों का शक्तिशाली ढंग से मुक़ाबला किया जा सकता है।

इस कृति में गहन विश्लेषण एवं व्यावहारिकता का समन्वय है।

लेखक के अनुसार भारत के विकास के महायज्ञ में सभी का योगदान समान रूप से अपेक्षित है। केवल सरकार पर आश्रित होना अन्याय होगा।

आशा है कि नीति नियोजक, नेतृवृन्द, प्रशासक, कर्मचारी, पंचायतों तथा नगरपालिकाओं के प्रतिनिधि तथा भारतीय जन-गण इन लेखों से प्रेरणा ग्रहण करके स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वाले नए भारत का निर्माण करेंगे जो स्वदेशी पथ पर चलकर आधुनिक विश्व-प्रतियोगिता में अग्रणी होगा।

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Language Hindi
Format Hard Back
Edition Year 1998
Pages 114p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21 X 14 X 1.5
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Editorial Review

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Pramod Kumar Agrawal

Author: Pramod Kumar Agrawal

प्रमोद कुमार अग्रवाल

 

जन्म : 15 अक्टूबर, 1950; उत्तर प्रदेश के झाँसी जनपद के बरुआसागर क़स्बे में।

शिक्षा : बी.एस.सी, एल-एल.बी., एल-एल.एम. डी.फिल. (विधि), एमबीए।

सम्पादन तथा प्रकाशन : अंग्रेज़ी में 20 पुस्तकें तथा हिन्दी में 45 पुस्तकें प्रकाशित।

वैश्विक साहित्य, त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका। एक दर्जन से अधिक जिनमें प्रमुख हैं : ‘प्रकाश’, ‘पृथ्वी की पीड़ा’, ‘साहिबगंज की बहू’, ‘सतलज से टेम्स तक’, ‘माफिया’ तथा ‘मीरजाफर’ (उपन्यास); ‘यूकेलिप्टस’, ‘गाँव गाँव की कहानियाँ’ (कहानी संग्रह); ‘निबन्ध निधि’, ‘निबन्ध महासागर’, ‘भारतीय सोच’, ‘न्यायतन्त्र और मानव अधिकार’, ‘भारत के विकास की चुनौतियां’, ‘भारत में पंचायती राज’, ‘गाँधी विचार और हम’, ‘जल प्रदूषण एवं गंगा निर्मलीकरण’, ‘भारत का संविधान’ (निबन्ध संग्रह); ‘भगवदगीता : नाट्यरूप’, ‘रामचरितमानस नाट्यरूप’, 'राधा की पाती कृष्ण के नाम', ‘चित्रकूट में राम-भरत मिलाप', मैं राम बोल रहा हूँ तथा 'संजय-धृतराष्ट संवाद' (भारतीय वांगमय)।

सम्मान : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा पुरस्कृत कृति ‘कारागार में कैदियों का जीवन' साहित्यकार संसद, विश्व साहित्य प्रकाशन समिति तथा हिन्दी सेवी समिति इलाहाबाद द्वारा सम्मानित, बुन्देलखंड विश्वविद्यालय तथा भारतीय हिन्दी परिषद द्वारा सम्मानित, सन् 2017 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा 'साहित्य महोपाध्याय सम्मान'।

 

विधि में प्रवक्ता, बिक्री कर एवं आयकर अधिकारी (वर्ष 1976) भारतीय प्रशासनिक सेवा (पश्चिम

बंगाल कैडर) में कार्यरत तथा संयुक्त सचिव भारत-सरकार तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से सेवा निवृत्त होकर पूर्णरूप से साहित्य सेवा में समर्पित।

ई-मेल : pk_usha@rediffmail.com

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