Bharat Ke Vikas Ki Chunotiyan

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Bharat Ke Vikas Ki Chunotiyan
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यदि सभी व्यक्ति निजी स्वार्थों में ही लिप्त हो जाएँ, तो इस संसार की गति बन्द हो जाएगी, सूर्य प्रकाश देना बन्द कर देगा एवं हवा चलना बन्द कर देगी।

यदि संगठन, संस्थान, समाज या देश आगे बढ़ेगा तो उस समृद्धि में उसे भी अपना अंश अवश्य ही एक दिन मिलेगा। जब तक इस तथ्य की सांस्कृतिक चेतना जाग्रत नहीं हो जाती, हमारा देश लँगड़ाकर ही चलता रहेगा।

भूमंडलीकरण का अर्थ यह नहीं है कि हम उदारीकरण या निजीकरण के नाम पर अपने आर्थिक ढाँचे का केन्द्रीकरण कर दें। सभी पद्धतियों का लक्ष्य है कि सबसे अधिक लोगों को सबसे अधिक लाभ पहुँचे।

महात्मा गांधी ने नीति-निर्धारकों को हर समय देश के निर्धनतम व्यक्ति की ओर ध्यान रखने की सलाह दी थी। हमें निश्चय ही विदेशी ‌क़र्ज़ों के बोझ को कम करने एवं महँगाई घटाने के लिए बचत एवं सादा-जीवन पद्धति को प्रोत्साहन देना होगा।

यह परमावश्यक है कि हम देश में आर्थिक विषमता को दूर करें, भूमि-सुधार कार्यक्रम को आगे बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्र में मानव-संसाधन का विकास करें।

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Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Edition Year 2013
Pages 164p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Pramod Kumar Agrawal

Author: Pramod Kumar Agrawal

प्रमोद कुमार अग्रवाल

 

जन्म : 15 अक्टूबर, 1950; उत्तर प्रदेश के झाँसी जनपद के बरुआसागर क़स्बे में।

शिक्षा : बी.एस.सी, एल-एल.बी., एल-एल.एम. डी.फिल. (विधि), एमबीए।

सम्पादन तथा प्रकाशन : अंग्रेज़ी में 20 पुस्तकें तथा हिन्दी में 45 पुस्तकें प्रकाशित।

वैश्विक साहित्य, त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका। एक दर्जन से अधिक जिनमें प्रमुख हैं : ‘प्रकाश’, ‘पृथ्वी की पीड़ा’, ‘साहिबगंज की बहू’, ‘सतलज से टेम्स तक’, ‘माफिया’ तथा ‘मीरजाफर’ (उपन्यास); ‘यूकेलिप्टस’, ‘गाँव गाँव की कहानियाँ’ (कहानी संग्रह); ‘निबन्ध निधि’, ‘निबन्ध महासागर’, ‘भारतीय सोच’, ‘न्यायतन्त्र और मानव अधिकार’, ‘भारत के विकास की चुनौतियां’, ‘भारत में पंचायती राज’, ‘गाँधी विचार और हम’, ‘जल प्रदूषण एवं गंगा निर्मलीकरण’, ‘भारत का संविधान’ (निबन्ध संग्रह); ‘भगवदगीता : नाट्यरूप’, ‘रामचरितमानस नाट्यरूप’, 'राधा की पाती कृष्ण के नाम', ‘चित्रकूट में राम-भरत मिलाप', मैं राम बोल रहा हूँ तथा 'संजय-धृतराष्ट संवाद' (भारतीय वांगमय)।

सम्मान : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा पुरस्कृत कृति ‘कारागार में कैदियों का जीवन' साहित्यकार संसद, विश्व साहित्य प्रकाशन समिति तथा हिन्दी सेवी समिति इलाहाबाद द्वारा सम्मानित, बुन्देलखंड विश्वविद्यालय तथा भारतीय हिन्दी परिषद द्वारा सम्मानित, सन् 2017 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा 'साहित्य महोपाध्याय सम्मान'।

 

विधि में प्रवक्ता, बिक्री कर एवं आयकर अधिकारी (वर्ष 1976) भारतीय प्रशासनिक सेवा (पश्चिम

बंगाल कैडर) में कार्यरत तथा संयुक्त सचिव भारत-सरकार तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से सेवा निवृत्त होकर पूर्णरूप से साहित्य सेवा में समर्पित।

ई-मेल : pk_usha@rediffmail.com

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