Uttar Aadhunikta Aur Samkalin Katha-Sahitya

Literary Criticism
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Uttar Aadhunikta Aur Samkalin Katha-Sahitya
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यह पुस्तक ‘उत्तर-आधुनिकता व समकालीनता बोध’ को भारतीय सन्दर्भ में प्रस्तुत करने का मौलिक प्रयास है। मौलिक इस दृष्टि में, क्योंकि यह विमर्श का विखंडनवादी स्वर लेकर उपस्थित होता है जो केन्द्र व हाशिया दोनों की स्थिति को एक साथ लेकर चलता है, जिसमें टकराहट की त्रासदी से उत्पन्न परिस्थितियों की निर्मिति है। यहाँ ‘महाआख्यानों के अन्त’ के साथ, नवीन लघुता बोध व हाशिए का केन्द्रवर्ती स्वर ही प्रमुखता प्राप्त करता है। इस कृति का मूल मन्तव्य यही रहा है कि हिन्दी जगत आयातित उत्तर-आधुनिक चिन्तन से बचते हुए भारतीय परिदृश्य में उत्तर-आधुनिकता को किसी पूर्वग्रह से मुक्त हो ‘स्वतंत्र विमर्श’ के रूप में उपस्थित करता है।

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Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2013
Edition Year 2013, Ed. 1st
Pages 191p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Editorial Review

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Author: Lakshmi Gautam

लक्ष्मी गौतम

जन्म : 5 जुलाई; फतेहपुर।

शिक्षा : हाईस्कूल से स्नातक प्रथम श्रेणी, एम.ए. हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी,
डी.फ़िल. की उपाधि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से।

शोधकार्य के पश्चात् स्वतंत्र लेखन व विविध साहित्यिक गोष्ठियों में सहभागिता। ‘समकालीन विमर्श’ पर कार्य चल रहा है।

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