Teri Ankhon Mein Raat Doobi Hai

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Teri Ankhon Mein Raat Doobi Hai
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आम इंसान की नज़र संसार को देखती है तो उस घटनाओं, व्यक्तियों के प्रति नफ़रत, दुख, क्रोध जैसे विभिन्न भाव पैदा होते हैं मगर जब ये नज़र प्रेम की नज़र बन जाती है तो उसमें संसार की हर वस्तु के प्रति शुकराने का भाव पैदा होता है। और हर पदार्थ के पीछे उसी ऊर्जा, अनवारे-इलाही आदि शक्ति नज़र आने लगती है। फिर तो महबूब में, मुर्शिद में, दोस्त में, दुश्मन में जन्म में, मृत्यु में, उसी अनवारे-इलाही का जलवा नज़र आने लगता है। यही बात है कि मजन का प्यार किसी संत की इबादत से कम नहीं।"तेरी आँखों में रात डूबी है" की ये ग़जलें जहाँ आफिस में काम करने वाली प्रेमिका, संसार से उकताये हुए आदमी, बेटी के प्रति प्रेम में डूबे पिता, विश्व समाज के बदलते हुए परिवेश की मंज़रकशी करती हैं, वहीं इन ग़ज़लों में भाषा की सादगी के साथ जुबान की दिलकश पेशगोई है। ये ग़ज़लें और नज्में एक प्रेमी, एक कामगार, एक साधक की भावनाओं का आईना है साथ ही शरीर और मन के पार रुहानी संसार की तरफ़ भी इशारे करती हैं सूफ़ियाना नज़र देती हैं। निश्चित रूप से इन नज्मों में ऐसा बहुत कुछ है जहाँ से हर इंसान को कभी न कभी गुज़रना है, ठहरना है।

सुर्ख खंजर लिये पीछे है हुजूमे-कातिल

शहरे-जाना से मगर होते भी रुखसत न बनें

क्योंकि ये शहरे-जाना है, परमात्मा का नगर है ये जगत। हमें इसमें जीना है और आनन्दपूर्ण जीना है। ये ग़जलें सुख-दुख के दो किनारों से आगे नये जश्न के सफ़र की तरफ़ ले जा रहीं हैं और उत्सव में जीने का मंगल सन्देश हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2021
Edition Year 2021, Ed. 1st
Pages 136p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Editorial Review

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Author: Osho Nilanchal

ओशो नीलांचल

ओशो नीलांचल युवा शायर प्रमोद (ओशो नीलांचल) का जन्म 23 ववम्बर 1967 को सागर (म.प्र.) में हुआ। मन्नू देवी और पिता रामशंकर की इस संता ने बी.एस.सी. एम.ए. अंग्रेजी साहित्य से किया, उर्दू में डिप्लोमा प्राप्त किया है। वे ओशो के शिष्य और ध्यान सिखाने वाले आचार्य हैं। उनकी रासलें विभिन्न गायकों ने गायी हैं ओशो जगत में उनके कई गीत नृत्य करने पर मजबूर करते हैं उनके गुजल संग्रह 'वक्त का दरिया' को 'अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति पुरस्कार' मिला है। 'ओशो तुम्हें सलाम' नाम से उनके समाधि गीत संकलन भी प्रकाशित हो चुका है। वे पश्चिम मध्य रेलवे में टिकट निरीक्षक भी हैं। निवास: गुलाब कालोनी, सागर- 470008, म.प्र.

ई-मेल: pramodkatbhatt@gmail.com

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