Samanya Manovigyan

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Samanya Manovigyan
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मनोविज्ञान मानव-समस्याओं के सम्यक् ज्ञान एवं समाधान के लिए समुचित दृष्टिकोण उपस्थित करता है। व्यक्ति में समुचित दृष्टिकोण का विकास हो, इसके लिए यह अनिवार्य है कि उसे मानव-जीवन-सम्बन्धी तथ्यों एवं सामान्य सिद्धान्तों का ज्ञान हो तथा वह इनकी खोज की विधियों से भलीभाँति परिचित हो। समुचित दृष्टिकोण का तात्पर्य है व्यक्ति की अवैयक्तिक (Impersonal) एवं वस्तुनिष्ठ (Objective) मनोवृत्ति। ऐसी मनोवृत्ति अपनाकर ही मनोवैज्ञानिक मानव-समस्याओं की खोज करता है। फलतः वह असामान्य व्यक्तियों (Abnormal individuals) को परामर्श, सहायता अथवा चिकित्सा का पात्र समझता है, न कि घृणा का। चोरी, हत्या जैसे असामाजिक कार्यों में संलग्न अपराधियों के प्रति भी वह घृणा के बदले सहानुभूति की मनोवृत्ति रखता है। इसी भाँति प्रतिदिन के जीवन में घटित होनेवाले सभी व्यवहारों के प्रति भी, चाहे वे वांछनीय हों अथवा अवांछनीय, अवैयक्तिक एवं वस्तुनिष्ठ मनोवृत्ति अपनाकर ही विचार करता है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2012
Edition Year 2012, Ed. 1st
Pages 399p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2.5
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Editorial Review

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Author: Ramprasad Pandey

रामप्रसाद पाण्डेय

जन्म : 1 जुलाई, 1925; गाँव—बाँक, अकोधीगोला, रोहतास (बिहार)।

शिक्षा : एम.ए. पीएच.डी. (मनोविज्ञान)।

कार्य : भूतपूर्व पीजी हेड, मनोविज्ञान विभाग, एल.एन. मिथिला यूनिवर्सिटी, दरभंगा। 16 जुलाई, 1951 को प्रोफ़ेसर के पद पर आर.डी.एस. कॉलेज, मुज़फ़्फ़रपुर में नियुक्ति। 20 दिसम्बर, 1976 को एल.एन. मिथिला यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग में नियुक्ति। 1985 में सेवानिवृत्त।

प्रमुख कृतियाँ : सामान्य मनोविज्ञान, मनोविज्ञान का इतिहास।

निधन : नवम्बर, 2004

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