Pita Ko Patra

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Pita Ko Patra

काफ़्का की हस्तलिपि में अपने पिता को लिखा उनका यह पत्र कुछ वर्ष पूर्व तक लापता माना जा रहा था और हाल ही के वर्षों में मिला है। पाठक जानते ही हैं कि काफ़्का मृत्यु से पहले अपनी सभी रचनाएँ अपने मित्र मार्क्स ब्रोड के पास इस निर्देश के साथ छोड़ गए थे कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें जला दिया जाए। लेकिन ब्रोड ने ऐसा नहीं किया और एक के बाद एक उन पांडुलिपियों को सम्‍पादित कर प्रकाशित करवा दिया।

इस ऐतिहासिक पत्र के अस्तित्व के बारे में ख़ुद ब्रोड को भी जानकारी नहीं थी। सन् 1953 में जब यह पत्र अपने अपूर्ण रूप में पहली बार प्रकाशित हुआ तो इसके प्राक्कथन में ब्रोड ने लिखा कि काफ़्का ने यह पत्र मूल रूप से टाइपिंग मशीन पर ही टाइप किया था और बाद में हाथ से ग़लतियाँ सुधारी थीं। टाइप किए हुए साढ़े चौवालीस पृष्ठों वाले पत्र में काफ़्का ने बाद में हाथ से लिखे दो पृष्ठ और जोड़े थे—ऐसा ब्रोड का मानना था।

काफ़्का बीसवीं सदी के सर्वोत्कृष्ट साहित्यिक प्रतिभाओं में एक थे। जर्मन भाषा के साथ विश्व के साहित्य में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। पिता को लिखा गया यह पत्र काफ़्का के भीतर के व्यक्ति को भी सामने लाता है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1997
Edition Year 1997, Ed. 1st
Pages 99p
Translator Mahesh Dutt
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 18.5 X 12.5 X 1.5
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Editorial Review

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Author: Franz Kafka

फ़्रांत्स काफ़्का

फ्रांत्स काफ़्का का जन्म 3 जुलाई, 1883 को प्राग (चेकोस्लोवाकिया) में हुआ। उन्‍होंने
18 जुलाई, 1906 में क़ानून में पीएच.डी. की उपाधि हासिल की।

उन्‍होंने जीवनयापन के लिए कार्य की शुरुआत अक्टूबर 1907 में ‘असीकुराजिओनी गेनेराली’ में सहायक की नौकरी से की। बाद में एक बीमा कम्पनी से जुड़ गए।

काफ़्का की पहली कहानी ‘बेट्राख्टुंग’ सन् 1908 में प्रकाशित हुई। इसी दौरान माक्स ब्रोड और मिलेना येज़ेन्स्का से उनकी मित्रता हुई, जिनकी उनके जीवन में अहम भूमिका रही। उन्‍होंने सन् 1909 में डायरी लिखना शुरू किया। सन् 1911 में यहूदी रंगमंच अभिनेता यिज़ाक ल्योवी से उनकी मित्रता हुई जिसके बाद यहूदी धर्म में रुचि बढ़ी।

प्रमुख कृतियाँ हैं—‘बेश्राइबुंग आइनेस कांप्फेस’ (डिस्क्रिप्शन ऑफ़ ए स्ट्रगल), ‘दास उअरटाइल’  (द जजमेंट), ‘डेअर प्रोत्सेस’ (द ट्रायल), ‘डी फ़रवांडलुंग’ (मैटामोरफ़ोसिस) और अमेरिका’।

काफ़्का ने सन् 1921 में अपनी सभी डायरियाँ मिलेना को सौंप दीं।

तपेदिक के कारण 3 जून, 1924 को आस्ट्रिया के टोफ़मान सैनिटोरियम में निधन।

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