Peeth Pichhe Ka Aangan

Fiction : Novel
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Peeth Pichhe Ka Aangan
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'पीठ पीछे का आँगन' आज दिन-भर रुक-रुक कर, चाव और प्यार से, पढ़ता रहा और तुम्हारी कलाकारी से अभिभूत होता रहा। पिछले तीन-चार सालों में शायद ही किसी उपन्यास को मैंने इतने प्यार से पढ़ा हो। पहले वाक्य ने ही मुझे जकड़ लिया : 'अन्तहीन काली ऊन'। अँधेरे को ऐसी अनूठी उपमा शायद ही किसी और ने दी हो। मैंने पढ़ते हुए इतने निशान लगाए हैं, इतने वाक्य के नीचे लकीरें खींची हैं कि कोई देखे तो हैरान हो। ज़ाहिर है कि मैं तुम्हारे इस उपन्यास से बहुत प्रभावित, बहुत आश्वस्त, बहुत चमत्कृत हुआ हूँ। पहले उपन्यास (‘अँधेरी खिड़कियाँ’) में जो सम्भावनाएँ थीं, इसमें वे साकार हो गई हैं। सबसे अधिक मैं इस बात से प्रभावित हूँ कि तुम सारे उपन्यास में बहुत संयत हो—और तुमने एक तरह से (फिर) स्थापित कर दिया है कि उपन्यास में अमूर्तन सम्‍भव ही नहीं, सुन्दर भी हो सकता है, कि प्रयोग अराजकता का पर्याय नहीं, कि 'प्रयोगवादी' उपन्यास भी उपन्यास ही है—साधारण यथार्थ के बग़ैर, भाषा और शिल्प के सहारे, आन्तरिकता के सहारे, मानवीय लाचारियों के सहारे...

कहने का मतलब यह कि तुमने अपने इस काम से मुझे प्रभावित ही नहीं किया, मोह भी लिया।    

—कृष्ण बलदेव वैद

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Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2019
Edition Year 2019, 1st Ed.
Pages 120p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
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Editorial Review

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Anirudh Umat

Author: Anirudh Umat

अनिरुद्ध उमट

28 अगस्त, 1964 को बीकानेर में जन्मे अनिरुद्ध उमट के अब तक दो उपन्यास, दो कविता-संग्रह, एक कहानी-संग्रह एवं एक निबंध-संग्रह प्रकाशित हैं। राजस्थानी कवि वासु आचार्य के साहित्य अकादेमी से सम्मानित कविता-संग्रह ‘सीर रो घर’ का हिन्‍दी में अनुवाद। ‘अँधेरी खिड़कियाँ’ पर राजस्थान साहित्य अकादेमी, उदयपुर का ‘रांगेय राघव स्मृति सम्मान’। संस्कृति विभाग (भारत सरकार) की ‘जूनियर फ़ेलोशिप’ तथा ‘कृष्ण बलदेव वैद फ़ेलोशिप’ प्रदत्त।

 

 

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