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Natya Prastuti : Ek Parichay-Hard Cover

Author: Ramesh Rajhans
ISBN: 9788171193486
Edition: 1987, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
Special Price ₹42.50 Regular Price ₹50.00
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9788171193486
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‘नाट्य-प्रस्तुति : एक परिचय’ रंगकर्म में रुचि रखनेवाले उन सभी व्यक्तियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है, जो नाटक के क्षेत्र में नए हैं और नाट्य-विधा के सम्बन्ध में अधिक विस्तृत व गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। इस पुस्तक का रचना-शिल्प इन अर्थों में अधिक पठनीय एवं ग्राह्य है कि इसमें रंगकर्म से सम्बद्ध सभी छोटे-छोटे तथ्यों की सिलसिलेवार चर्चा की गई है, जैसे—अभिनय, निर्देशन, ध्वनि-व्यवस्था, प्रकाश-व्यवस्था, पात्र-चयन, संवाद, दर्शक, रंग-स्थल आदि।

गाँव-क़स्बे अथवा छोटे और पिछड़े इलाक़ों में रहनेवाले वे तमाम प्रतिभाशाली नाट्य-प्रेमी इस कृति से लाभान्वित होंगे जिनके लिए किसी नाट्य-विद्यालय अथवा नाट्य-संस्था में सम्मिलित होना सम्भव नहीं है लेकिन जो छोटी-छोटी रंग-मंडलियाँ बनाकर नाट्य-क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस पुस्तक के माध्यम से वे नाट्य-विधा से विधिवत् परिचित होंगे और अपनी प्रस्तुतियों को अधिक सम्प्रेषणीय तथा अधिक अर्थवत्तापूर्ण बना सकेंगे।

इस पुस्तक में भारतीय रंग-पद्धति के साथ-साथ पश्चिमी निर्देशकों और प्रस्तोताओं के विचारों और तकनीक का भी वर्णन है। चूँकि आज के नाट्य-मंच का स्वरूप बहुत कुछ ‘प्रोसीन्यम’ है और यह प्रोसीन्यम थियेटर दरअसल पश्चिमी रंग-पद्धति है, इसलिए पश्चिमी रंग-पद्धति और रंग-परम्परा की चर्चा भी इस पुस्तक के दायरे में है। दोनों ही रंग-पद्धतियों के बुनियादी तत्त्व एक हैं और किसी एक रंग-पद्धति को गम्भीरतापूर्वक समझ लेने से दूसरी को समझना काफ़ी सरल है।

नाट्य-विधा के क्षेत्र में रमेश राजहंस की यह श्रमसाध्य कृति निश्चय ही बेहद महत्त्वपूर्ण है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1987
Edition Year 1987, Ed. 1st
Pages 151p
Price ₹50.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Ramesh Rajhans

Author: Ramesh Rajhans

रमेश राजहंस

रमेश राजहंस का जन्म 1 जनवरी, 1947 को भागलपुर, बिहार में हुआ। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय, बिहार से इतिहास व समाजशास्त्र में स्नातक किया और बम्बई विश्वविद्यालय, बम्बई से स्नातकोत्तर (हिन्दी) किया।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘अपने-अपने हिस्से का दुख’ (कहानी-संग्रह); ‘कैम्पफ़ायर’ (एकांकी); ‘मृगतृष्णा’, ‘रिश्ते की तलाश’, ‘नासूर’, ‘प्रतिबिम्ब’ (रेडियो नाटक)। अनुवाद—‘प्रेत’, ‘गुड़ियाघर’ (हेनरिख इब्सन), ‘बैरिकेड’ (उत्पल दत्त), ‘राजदर्शन’ (मनोज मित्रा), ‘रक्षा बन्धन’ (अथोल फ़्यूगार्ड)। उनके द्वारा निर्देशित प्रमुख नाटक हैं—‘शुतुर्मुर्ग’, ‘चिन्दियों की एक झालर’, ‘पेपरवेट’, ‘फन्दी, बन्धन अपने-अपने’, ‘प्रेत’, ‘गुड़ियाघर’, ‘अन्नु’ (प्रेम का अर्थशास्त्र)।

उन्हें महाराष्ट्र सरकार राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी के ‘वी. शान्तराम सम्मान’ से सम्मानित किया गया। 

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