Mujhe Aise Padhao

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Mujhe Aise Padhao
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सीखने का शिक्षा में और शिक्षा का मानव के गुणात्मक विकास में अहम योगदान है। गुणात्मक शिक्षण के लिए ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण’ पूर्वापेक्षित है। यह पुस्तक ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण के निर्माण’ में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सीखने-सिखाने से जुड़े मार्गदर्शकों की सहायता करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण’ शिक्षक, छात्र तथा सीखने के परिवेश के बीच आवश्यक तालमेल के बिना असम्भव है।

इस पुस्तक में सीखने तथा सिखाने के उन व्यावहारिक अनछुए पहलुओं को सम्मिलित किया गया है, जो विद्यार्थियों में सीखने की ललक पैदा करने, विषय की ग्राह्यता बढ़ाने के अतिरिक्त शिक्षकों की अपने पेशे से रुचि एवं सन्तुष्टि बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। सम्पूर्ण पुस्तक को चार भागों में बाँटकर इस उद्देश्य को पूरा किया गया है। पहले भाग में जहाँ छात्रों की पहचान के लिए उनमें पाई जानेवाली मनोवैज्ञानिक, सामाजिक तथा आर्थिक भिन्नताओं, मसलन—परिपक्वता, बुद्धि, लिंग, सामाजिक-आर्थिक स्तर इत्यादि पर प्रकाश डाला गया है, वहीं दूसरे भाग में उत्पादक शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिए सीखने में शिक्षकों की भूमिका के महत्त्व को रेखांकित किया गया है। पुस्तक के तीसरे भाग में सीखने के परिवेश को शिक्षण के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक पहलुओं पर चर्चा की गई है। चौथे और अन्तिम भाग में सीखने की प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए मापन और मूल्यांकन तथा सीखने में पिछड़नेवाले विद्याथियों की काउन्सिलिंग की प्रक्रिया से अवगत कराया गया है।

किसी भी शिक्षक के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने जीवनकाल में ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों के मन में घनात्मक परिवर्तन लाना है। इस पुस्तक के माध्यम से हमारा यह प्रयास है कि शिक्षक तथा अभिभावक अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित कर उनके सच्चे मार्गदर्शक बन पाएँ।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2010
Edition Year 2016, Ed. 3rd
Pages 200p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14 X 1.6
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Editorial Review

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Mukesh Kishore

Author: Mukesh Kishore

मुकेश किशोर

जन्म : 15 अगस्त, 1957

शिक्षा : पटना विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में एम.ए. तथा पीएच.डी.।

चिकित्सा कार्य : अम्बा काउन्सिलिंग सेंटर की स्थापना 11 अगस्त, 1994 में। तब से मनोवैज्ञानिक समस्याओं से ग्रसित लोगों का काउन्सिलिंग एवं दूसरी मनोवैज्ञानिक पद्धतियों से उपचार, आर.सी.आई. द्वारा अधिकृत। बिहार एवं झारखंड के अधिकांश स्कूलों के विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा अभिभावकों का मनोवैज्ञानिक विषयों पर मार्गदर्शन।

शिक्षण-कार्य : पटना विश्वविद्यालय के एम.एस.डब्ल्यू. के छात्रों का शिक्षण, जाकिर हुसैन प्रबन्धन संस्थान में बी.बी.ए. तथा एम.बी.ए. के छात्रों का शिक्षण। इग्नू के डिप्लोमा इन फेमिली एजुकेशन एवं एड्स के विद्यार्थियों की काउन्सिलिंग क्लासेज। बिहार पुलिस के प्रशिक्षण केन्द्र ए.टी.एस. में पुलिस पदाधिकारियों का बाल अपराध एवं रोकथाम विषय पर शिक्षण। यू.जी.सी. द्वारा व्याख्याताओं के लिए आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में रिसोर्स पर्सन।

लेखन-कार्य : ‘सफलता के सोपान : बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास’ अम्बा काउन्सिलिंग सेंटर द्वारा प्रकाशित। नालन्दा खुला विश्वविद्यालय के एम.ए. क्लिनिकल साइकोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए अध्ययन सामग्री का लेखन। पटना विश्वविद्यालय की एन.एस.एस. यूनिट की ‘आशादीप’ पत्रिका में लेखों के माध्यम से युवाओं का यौन विषयों एवं जीवन शैली विषय पर मार्गदर्शन। दैनिक जागरण तथा हिन्दुस्तान अख़बारों के माध्यम से मनोविज्ञान विषय पर जीवनोपयोगी लेख। दैनिक जागरण के कैरियर हेल्प लाइन के माध्यम से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का मार्गदर्शन।

अन्य सेवाएँ : एफ.पी.ए.आई. (फेमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया) की पटना शाखा में सेक्स एजुकेशन इकाई में काउन्सिलर एवं बालिका भ्रूण हत्या रोकथाम इकाई में प्रोग्राम ऑफ़िसर। यू.एन.डी.पी. (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) में राष्ट्रीय परामर्शदाता एवं विशेषज्ञ। बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति में

एन.जी.ओ. एडवाइज़र। निमहान्स, बंगलूरु कॉन्फ्रेंस में मनोचिकित्सीय हस्तक्षेप विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुति। एन.आई.एम.एच., सिकन्दराबाद में मनोवैज्ञानिकों के लिए आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रशिक्षण।

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