Chhattisgarh Ke Vivekanand

Author: Kanak Tiwari
As low as ₹590.75 Regular Price ₹695.00
You Save 15%
In stock
Only %1 left
SKU
Chhattisgarh Ke Vivekanand
- +

आधुनिक भारतीय मनीषा के अग्रणी उन्नायकों में से एक स्वामी विवेकानन्द विषयक इस पुस्तक का आधार उनके जीवन का वह समय है जो उन्होंने छत्तीसगढ़ की भूमि पर रायपुर में बिताया। उनकी ओजस्वी चेतना के जो स्फुलिंग 11 सितम्बर, 1893 को शिकागो में विस्फोटक ढंग से दुनिया के सामने आए, उनके कुछ बीज निश्चय ही किशोरावस्था के उन ढाई वर्षों में भी पड़े होंगे जब उन्नीसवीं सदी के छत्तीसगढ़ के अभावों का साक्षात्कार उनके आकार लेते मानस से हुआ होगा।

यह आश्चर्यजनक है और दुर्भाग्यपूर्ण भी कि विवेकानन्द के अधिकतर जीवनीकारों ने उनके इस छत्तीसगढ़ प्रवास को अनदेखा किया है। इसलिए ऐसे तथ्य भी सामने नहीं आ सके जिनसे उनके जीवन में 1875 से 1877 के इस कालखंड के महत्त्व को रेखांकित किया जा सके। लेकिन क्या ये सच नहीं है कि व्यक्ति के जीवन में किशोरावस्था के अनुभवों की भूमिका निर्णायक होती है। ज्ञात हो कि विवेकानन्द उस समय 12 वर्ष के थे, जब उनके पिता उन्हें रायपुर लेकर आए और दो वर्ष से ज़्यादा वे यहाँ पर रहे। लोक विश्वास है कि जबलपुर से रायपुर बैलगाड़ी से आते हुए ही उन्हें माँ की गोद में लेटे हुए दिव्य ज्योति के दर्शन हुए थे। यह भी माना जा सकता है कि इसी दौरान उनका परिचय हिन्दी और छत्तीसगढ़ी से हुआ और यहाँ पर उन्हें भारत की ग़ुरबत की वह झलक भी मिली जो उनके व्याकुल चिन्तन का आधार बनी।

यह पुस्तक विवेकानन्द के छत्तीसगढ़ से सम्बन्ध के साथ-साथ उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व और वैचारिक सम्पदा को एक जिल्द में समेटने का प्रयास है। विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा लिखे आलेखों के अलावा पुस्तक में विवेकानन्द का चर्चित शिकागो व्याख्यान भी प्रस्तुत किया गया है और कुछ अन्य सामग्री भी जो उन्हें समग्रता में समझने में सहायक होगी।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2015
Edition Year 2019, Ed. 3rd
Pages 208p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14 X 2
Write Your Own Review
You're reviewing:Chhattisgarh Ke Vivekanand
Your Rating
Kanak Tiwari

Author: Kanak Tiwari

कनक तिवारी

गांधी, विवेकानन्द, राममनोहर लोहिया और भगत सिंह से प्रभावित वरिष्ठ अधिवक्ता और लेखक कनक तिवारी गम्भीर और देशभक्त विचारक हैं। 26 जुलाई, 1940 को जन्मे कनक तिवारी ने अंग्रेज़ी साहित्य के प्राध्यापक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की। 8-9 वर्षों तक विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ाने के बाद ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘नवभारत’, ‘नागपुर टाइम्स’ आदि कई पत्रों के संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की। 1971 में रविशंकर विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की परीक्षा में स्वर्ण पदक लेकर वकालत का व्यवसाय चुना। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया, छत्तीसगढ़ बार एसोसिएशन, इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट और इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ़ ज्यूरिस्ट्स के सक्रिय सदस्य हैं।

कनक तिवारी मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री, छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के कार्यकारी अध्यक्ष, मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम तथा मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं। मध्य प्रदेश में महात्मा गांधी एक सौ पच्चीसवाँ जन्मवर्ष समारोह समिति के राज्य समन्वयक भी रहे। लगभग नब्बे पुस्तक-पुस्तिकाओं का सम्पादन-प्रकाशन किया। पिछले 50 वर्षों से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लिखने के अतिरिक्त मानसेवी प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।

प्रमुख कृतियाँ : ‘संविधान का सच’, ‘काल इनमें ठहर गया है’, ‘फिर से हिन्द स्वरा’,
‘बस्तर : लाल क्रान्ति बनाम ग्रीन हंट’, ‘हिन्द स्वराज का सच’, ‘विवेकानन्द का जनधर्म’, ‘गांधी और पंचायती राज’ तथा ‘गांधी का देश’। प्रकाश्य पुस्तक : ‘संविधान की पड़ताल’।

सम्प्रति : अध्यक्ष—हिन्द स्वराज शोधपीठ, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता तथा जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर। संयोजक—छत्तीसगढ़ संस्कृति फ़ाउंडेशन तथा संरक्षक—‘संस्कार’ (साहित्यिक तथा सांस्कृतिक संस्था)।

ई-मेल : kanaktiwari.cg@gmail.com

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top