Bhakti Andolan Aur Bhakti Kavya

Literary Criticism
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Bhakti Andolan Aur Bhakti Kavya

प्रस्तुत पुस्तक का सम्बन्ध भक्ति-आन्दोलन और भक्ति-काव्य से है, भक्ति-आन्दोलन के मूल में जनता के दुःख-दर्द ही हैं और उन दुःख-दर्दों को बड़ी जीवन्त मानवीयता के साथ उभरने, उनसे एकमेक होकर सामने आने में ही भक्ति-आन्दोलन की शक्ति को देखा जा सकता है। अनुमान कर सकते है कि तीन शताब्दियों से भी अधिक समय तक अपने पूरे वेग के साथ गतिशील होनेवाले इस भक्ति-आन्दोलन में जनता के ये दुःख-दर्द कितनी गहरी संवेदनशीलता के सान्निध्य में उभरे होंगे। भक्तिकाव्य में, उसके रचनाकारों में, अन्तर्विरोध भी हैं, उनकी सीमाएँ भी हैं। पुस्तक में उनकी चर्चा भी की गई है।

हम भक्तिकाव्य जैसा काव्य आज नहीं चाहते, पर जिन मूलवर्ती गुणों के कारण भक्ति कविता कालजयी हुई, वे गुण ज़रूर उससे लेना चाहते हैं, और इन गुणों के नाते ही हम उसे साथ लेकर चलना भी चाहते हैं।

पुस्तक में निबन्धों में पुनरुक्ति भी मिल सकती है। अलग-अलग समय में लिखे गए निबन्ध ही मिल-जुलकर यह किताब बना रहे हैं। इनमें से कबीर, सूर तथा भक्ति-आन्दोलन से जुड़े निबन्ध प्रकाशित भी हो चुके हैं। यहाँ वे कुछ संशोधित परिवर्द्धित रूप में फिर से प्रकाशित हो रहे हैं। मलिक मुहम्मद जायसी, तुलसी, भक्ति-आन्दोलन का पहला निबन्ध अप्रकाशित है। वे यहाँ पहली बार ही प्रकाशित हो रहे हैं। नानकदेव तथा गुरु गोविन्द सिंह पर लिखे निबन्ध भी अप्रकाशित हैं। ये विशेष अवसर के लिए लिखे गए निबन्ध थे, किन्तु किताब के विषय की सीमा में आ सकने के नाते उन्हें भी समेट लिया गया है। भक्ति-आन्दोलन सम्बन्धी निबन्धों में प्रमुखतः के. दामोदरन, आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल तथा गजानन माधव मुक्तिबोध के विचारों को ही रेखांकित किया गया है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1982
Edition Year 2021, Ed. 4th
Pages 303p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 13.5 X 1.5
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Editorial Review

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Shivkumar Mishra

Author: Shivkumar Mishra

शिवकुमार मिश्र

जन्म : 2 फरवरी, 1931; कानपुर (उ.प्र.)।

शिक्षा : एम.ए. तक की शिक्षा, कानपुर में। पीएच.डी. तथा डी.लिट्. सागर विश्वविद्यालय, सागर, म.प्र. से।

कार्य : सन् 1959 से सन् 1977 तक सागर विश्वविद्यालय में तथा उसके उपरान्त 1991 ई. तक सरदार पटेल विश्वविद्यालय, वल्लभ विद्यानगर (गुजरात) में अध्यापन। भारत सरकार की सांस्कृतिक आदान-प्रदान योजना के तहत 1991 ई. में 15 दिन की सोवियत यूनियन की सांस्कृतिक यात्रा।

जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।

प्रमुख कृतियाँ : ‘नया हिन्दी काव्य’, ‘प्रगतिवाद’, ‘मार्क्सवादी साहित्य-चिन्तन’, ‘यथार्थवाद’, ‘प्रेमचंद : विरासत का सवाल’, ‘आचार्य शुक्ल और हिन्दी आलोचना की परम्परा’, ‘भक्ति आन्दोलन और भक्ति काव्य’, ‘मार्क्सवाद देवमूर्तियाँ नहीं गढ़ता’, ‘आधुनिक कविता और युग-सन्दर्भ’, ‘इतिहास, साहित्य और संस्कृति’ सहित साहित्य-समीक्षा से सम्बन्धित कई पुस्तकों का लेखन। साहित्य-समीक्षा से सम्बन्धित आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी की चार पुस्तकों तथा विदेशी लेखकों की चार पुस्तकों का सम्पादन-पुनःप्रस्तुति।

पुरस्कार : ‘मार्क्सवादी साहित्य-चिन्तन’ पुस्तक पर सन् 1975 ई. में ‘सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड’।

निधन : 21 जून, 2013

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