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Aadhunik Hindi Sahitya Ka Itihas

Author: Bachchan Singh
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Aadhunik Hindi Sahitya Ka Itihas

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आधुनिक युग इतनी तेजी से बदल रहा है कि साहित्य के बदलाव से भी उसे समझा जा सकता है। इस बदलाव को, क्षिप्रतर बदलाव को साहित्य और इतिहास दोनों के संदर्भों में एक साथ पकड़ना ही इतिहास है। यह पकड़ तब तक विश्वसनीय नहीं हो सकती जब तक समसामयिक अखबारी साहित्य को श्रेष्ठ भविष्योन्मुखी साहित्य से अलगाया न जाय। प्रत्येक युग का आधुनिक काल ऐसे साहित्य से भरा रहता है जो साहित्येतिहास के दायरे में नहीं आता। किन्तु यह जरूरी नहीं है कि हम अपने इतिहास के लिए ग्रंथों का जो अनुक्रम प्रस्तुत करेंगे वह कल भी ठीक होगा, अपरिवर्तनीय होगा।

इस नये संस्करण में कुछ पुरानी बातों को बदल दिया गया है और नये तथ्यों के आधार पर उनका नया अर्थापन किया गया है। इस संस्करण को अद्यतन बनाने के लिए बहुत सारे लेखकों, कवियों और रचनाकारों को भी सम्मिलित कर लिया गया है अब यह अद्यतन रूप में आपके सामने है।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2016
Pages 395p
Publisher Lokbharti Prakashan
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Bachchan Singh

Author: Bachchan Singh

बच्चन सिंह

बच्चन सिंह का जन्म 2 जुलाई, 1919 को जौनपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की।

आलोचना के क्षेत्र में उनका योगदान इन पुस्तकों के रूप में उपलब्ध है—‘क्रान्तिकारी कवि निराला’, ‘नया साहित्य’, ‘आलोचना की चुनौती’, ‘हिन्दी नाटक’, ‘रीतिकालीन कवियों की प्रेम-व्यंजना’, ‘बिहारी का नया मूल्यांकन’, ‘आलोचक और आलोचना’, ‘आधुनिक हिन्दी आलोचना के बीज शब्द’, ‘साहित्य का समाजशास्त्र और रूपवाद’, ‘आधुनिक हिन्दी साहित्य का इतिहास’, ‘भारतीय और पाश्चात्य काव्यशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन तथा हिन्दी साहित्य का दूसरा इतिहास’। कथाकार के रूप में उन्होंने ‘लहरें और कगार’, ‘सूतो व सूतपुत्रो’ वा (उपन्यास) तथा ‘कई चेहरों के बाद’ (कहानी-संग्रह) की रचना की। ‘प्रचारिणी पत्रिका’ के लगभग एक दशक तक सम्‍पादक रहे।

5 अप्रैल, 2008 को उनका निधन हुआ। 

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