Vichar Ka Kapda

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ISBN:9789389577723
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Vichar Ka Kapda
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‘‘क़ायदे से अनुपम मिश्र न लेखक थे, न पत्रकार। वे साफ़ माथे के एक आदमी थे जो हर हालत में माथा ऊँचा और साफ़ रखना चाहते थे। उनकी निराकांक्षा उनकी बुनियादी बेचैनियों को ढाँप नहीं पाती थी। ये बेचैनियाँ ही उन्हें कई बार ऐसे प्रसंगों, व्यक्तियों, घटनाओं, वृत्तियों को खुली नज़र देखने-समझने की ओर ले जाती थीं। उनकी संवेदना में ऐसी ऐन्द्रियता थी कि वे विचार का कपड़ा भी पहचान लेती थीं। कुल मिलाकर अनुपम मिश्र की अकाल मृत्यु के बाद शेष रह गई सामग्री में से किया गया यह संचयन हिन्दी में सहज, निर्मल और पारदर्शी, मानवीय गरमाहट से भरे गद्य का विरल उपहार है। हमें मरणोत्तर अनुपम मिश्र को उनकी भरी-पूरी जीवन्तता में प्रस्तुत करने में प्रसन्नता है।”

—अशोक वाजपेयी

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Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2020
Edition Year 2020, 1st Ed.
Pages 454p
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Publisher Rajkamal Prakashan
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Editorial Review

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Anupam Mishra

Author: Anupam Mishra

अनुपम मिश्र

जन्‍म : 5 जून 1948; जन्म-स्थान : वर्धा (महाराष्ट्र)।

पिता : स्वर्गीय श्री भवानीप्रसाद मिश्र

शिक्षा : एम.ए.। दक्षता : फ़ोटोग्राफ़ी एवं लेखन।

वर्ष 1977 में पर्यावरण कक्ष के संचालक के रूप में ‘गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान’ से जुड़े। पारम्परिक जल संरक्षण के लिए वर्ष 1992 में ‘के.के. बिड़ला फ़ेलोशिप’।

कृतियाँ : छोटी-बड़ी 20 किताबें, जिनमें प्रमुख हैं—‘आज भी खरे हैं तालाब’, ‘राजस्थान की रजत बूँदें’, ‘साफ माथे का समाज’, ‘महासागर से मिलने की शिक्षा’, ‘अच्छे विचारों का अकाल’।

‘आज भी खरे हैं तालाब’ और ‘राजस्थान की रजत बूँदे’ का समाज ने अच्छा स्वागत किया है। ‘आज भी खरे हैं तालाब’ के उर्दू, बांग्‍ला, मराठी, गुजराती, पंजाबी और अंग्रेज़ी तथा ‘राजस्थान की रजत बूँदें’ के फ़्रेंच, अंग्रेज़ी, बांग्‍ला अनुवाद भी प्रकाशित हुए हैं। इनके अलावा अकाल की परिस्थितियों में देश के 11 आकाशवाणी केन्द्रों ने इन पुस्तकों को पूरा का पूरा प्रसारित किया है।

सम्मान : ‘इन्दिरा गाँधी वृक्षमित्र पुरस्कार’, ‘चन्द्रशेखर आज़ाद राष्ट्रीय पुरस्कार’, ‘जमनालाल बजाज पुरस्कार’, ‘वैद सम्मान’, दिल्ली का ‘हिन्दी अकादेमी सम्मान’।

निधन : 19 दिसम्बर, 2016

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