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McCluskieganj

Author: Vikas Kumar Jha
Edition: 2026, Ed. 4th
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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McCluskieganj

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मैकलुस्कीगंज, राँची के पास बसे एक एंग्लो-इंडियन गाँव का नाम है। इसी गाँव को केन्द्र मानकर लिखा गया है उपन्यास—‘मैकलुस्कीगंज’! आंग्ल मूल के हिन्दुस्तानियों का चाक गिरेबाँ दिखानेवाला यह हिन्दी का अद्वितीय उपन्यास है। पहले यह गाँव बिहार में था लेकिन वर्ष 2000 में झारखंड गठन के पश्चात् मैकलुस्कीगंज झारखंड प्रान्त का एक गाँव है। इस तरह कई राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक परिवर्तनों के बावजूद बीते कई दशकों से इस गाँव की पीड़ा इस सवाल के साथ अपनी जगह कायम है कि क्या एक दिन पृथ्वी के नक़्शे से मैकलुस्कीगंज का नामोनिशान मिट जाएगा?


उपन्यास में एंग्लो-इंडियन और आदिवासी समुदाय के जीवन-दर्शन और परिवेश की न सिर्फ़ मोहक झाँकियाँ हैं बल्कि इन दोनों के रक्त में समाए सन्तापों की मार्मिक व्याख्या भी है। भारत की आज़ादी के तक़रीबन डेढ़ दशक पूर्व अस्तित्व में आए ‘मैकलुस्कीगंज’ पतझड़ और बसन्त के कालचक्र की अद्भुत महागाथा है। ‘मैकलुस्कीगंज’ के बहाने यह भारत की वर्तमान पीढ़ी की भी कथा है, जो पश्चिमी बाज़ारवाद की होड़ में अपनी जड़ों से कटकर लगातार उसकी कसक महसूस कर रही है। इस लिहाज़ से यह उपन्यास पाठकों को आगाह करता है।


मैकलुस्कीगंज के पात्र, उनके परिवेश और सम्बद्ध जनजातीय क्षेत्र के हालात को उपन्यासकार ने एक अनुभूत सत्य की तरह अद्भुत अभिव्यक्ति दी है। झारखंड की समस्याएँ और वहाँ के सामाजिक-राजनीतिक हालात इस उपन्यास में हू-ब-हू चित्रित हैं। छोटानागपुर और मैकलुस्कीगंज से जो परिचित हैं, उन्हें इस उपन्यास को पढ़ते हुए यह महसूस होगा कि नायक और नायिका के इर्द-गिर्द कुछ घटनाओं और परिस्थितियों का ताना-बाना बुनने और उनकी भावनात्मक बुनियाद पर संवादों को विकसित करने के लिए थोड़ी-बहुत काल्पनिकता का सहारा तो लिया गया है लेकिन ज़्यादातर हिस्सों में यथार्थ को बख़ूबी सामने रखा गया है।

कुल मिलाकर ‘मैकलुस्कीगंज’ उपन्यास विश्वभाव का एक ऐसा अनुपम दस्तावेज़ है, जो निरीह, निर्बल और भावुक कौम की पीड़ा का प्रतिकार चाहनेवालों के पक्ष में खड़ा हो सकता है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2010
Edition Year 2026, Ed. 4th
Pages 534p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 4
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Vikas Kumar Jha

Author: Vikas Kumar Jha

विकास कुमार झा

10 जुलाई, 1961 को बैरगिनिया, सीतामढ़ी, बिहार में जन्मे विकास कुमार झा हिन्दी पत्रकारिता के एक समर्थ हस्ताक्षर हैं। 
उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘बिहार में राजनीति का अपराधीकरण’, ‘सत्ता के सूत्रधार : आजादी के बाद का भारत’ (राजनैतिक दस्तावेज); ‘मैकलुस्कीगंज’, ‘वर्षावन की रूपकथा’, ‘गयासुर संधान’, ‘राजा मोमो और पीली बुलबुल’ (उपन्यास); ‘उल्लास की नाव’ (पॉप संगीत की मल्लिका उषा उथुप की जीवनी); ‘इस बारिश में’ (कविता-संग्रह); ‘जमपुत्र’, ‘सोनमछरिया’ (मैथिली में लिखित नाटक) और ‘परिचय-पत्र’ (बिहार के बांग्ला-भाषियों के जीवन पर बांग्ला पुस्तक)। 
बिहार की मुक्तिकामी जनता के संघर्ष में सदैव सक्रिय रचनात्मक हिस्सेदारी।

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