Arambh Hai Prachand

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Arambh Hai Prachand
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हिन्दी फ़िल्मों के गाने अब हिन्दी कविता और उर्दू शायरी का विस्तार-भर नहीं रह गएअब वे अपने आप में एक स्वतंत्र विधा हैं उनके लिखने का ढंग अलग है वे अपनी बात भी अलग ढंग से कहते हैं उनकी बिम्बों की योजनाशब्दों का चयन और संगीत के साथ उनकी हमक़दमी उन्हें पढ़ी जानेवाली कविता से अलग बनाती है इसलिए उनको पाठ में देखना भी उन्हें जैसे नए सिरे से जानना होता है

और ये पीयूष मिश्रा के गाने हैं पीयूष मिश्रा जो अभिनेता हैंसंगीतकार हैंऔर थियेटर के एक बड़े नाम ही नहींएक मुहावरा रहे हैं ये गाने उन्होंने या तो फ़िल्मों के लिए ही लिखे या अपने लिए लिखे और फ़िल्मों ने उन्हें ले लिया पीयूष मिश्रा की बिम्ब-चेतना का विस्तार बहुत व्यापक है वे समाज सेदेश-विदेश की राजनीति सेव्यक्ति और समाज के आपसी द्वन्द्व से विचलित रहते हैंउन पर सोचते हैं और इसलिए जब वे किसी दिए गए फ़िल्म-दृश्य को अपने गीत की लय में विजुअलाइज करते हैं तो उनकी कल्पना उसकी सीमाओं को लाँघकर दूर-दूर तक जाती है वे सामने मौजूद पात्रों के परिवेश को व्यापक सामाजिक-राजनीतिक सन्दर्भों में रूपायित करते हैं और पर्दे पर मौजूद दृश्य की साक्षी आँखों को सोचने का एक बड़ा परिदृश्य देते हैं पीयूष मिश्रा के गीत चरित्रों के संवाद नहीं होतेउनकी नियति की व्याख्या होते हैं। ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ और गुलाल जैसी फ़िल्मों के गाने हिन्दी फ़िल्म गीतों के इतिहास का एक अलग अध्याय हैं

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Language Hindi
Format Paper Back
Edition Year 2019, Ed. 2nd
Pages 96p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Editorial Review

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Piyush Mishra

Author: Piyush Mishra

पीयूष मिश्रा

परिचय मुमकिन नहीं, न ही उन्हें पसन्द है। दोस्तों में ‘पीयूष भाई’ छात्रों में ‘सर’। 1983 से 2003 तक दिल्ली में थियेटर किया। आजकल मुम्बई सिनेमा नगरी में व्यस्त हैं, इस उम्मीद के साथ कि बदलाव वहाँ भी होगा।

प्रकाशित कृतियाँ : ‘जब शहर हमारा सोता है’, ‘गगन दमामा बाज्यो’, ‘वो अब भी पुकारता है’, ‘सन् 2025’ (नाटक); ‘कुछ इश्‍क़ किया कुछ काम किया’ (शायरी और कविता-संग्रह); ‘तुम मेरी जान हो रजि़या बी’ (कविता-संग्रह); ‘मेरे मंच की सरगम’ (थियेटर के गीत); ‘आरम्भ है प्रचण्ड’ (गीत)।

 

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