Teri Mehfil Mein Lekin Hum Na Honge

Author: SANJEEV RANJAN
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Teri Mehfil Mein Lekin Hum Na Honge
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तेरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे डीपीटी की याद में उनके घनिष्ठ मित्रों की प्रस्तुति है। डीपीटी यानी देवी प्रसाद त्रिपाठी, जेएनयू के प्रसिद्ध छात्र नेता, राजीव गांधी के सलाहकार, शरद पवार की पार्टी के महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता, पूर्व राज्यसभा सांसद, कवि, लेखक और चिंतक, और इन सबसे ऊपर अपूर्व वक्ता व हाज़िरजवाब ज़िन्दादिल इंसान जिनके चाहनेवाले आपको हर जगह मिलेंगे। राजनीति में तो मिलेंगे ही हर पार्टी में, साहित्य में, पत्रकारिता में, रंगकर्मियों के बीच, फ़िल्म जगत में, हर जगह उनकी प्रतिभा के प्रति लोगों में गहरा आदर रहा और लोग उनसे बहुत प्यार से पेश आए। इस पुस्तक में डीपीटी से सम्बद्ध सभी जिज्ञासाओं का उत्तर है। वह कहाँ पैदा हुए, किस पृष्ठभूमि में उनकी पढ़ाई-लिखाई और परवरिश हुई, वह छात्र-जीवन में कैसे थे, किस तरह वह विलक्षण वक्ता बने और विभिन्न भाषाओं पर चमत्कारी अधिकार प्राप्त किया, इलाहाबाद और जेएनयू में कैसे प्रसिद्ध हुए, राजीव गांधी के क़रीब कैसे आए, क्या परिस्थितियाँ बनीं कि वह शरद पवार से जुड़े, राज्यसभा में उनका कार्यकाल कैसा रहा, और उनकी यारबाशी के सारे क़िस्से जो उन्हें महफ़िलों का जान बनाती थीं। चूँकि लेख सारे घनिष्ठ मित्रों के हैं, इसलिए सारे तथ्य प्रामाणिक और बातें भावभीनी हैं। इस पुस्तक का एक और बड़ा आकर्षण है, उन्नीस पृष्ठों में डीपीटी का लम्बा साक्षात्कार—जिनका डीपीटी से मिलने का संयोग न हुआ, उनकी डीपीटी से मुलाक़ात हो जाएगी।
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Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2022
Edition Year 2022, Ed. 1st
Pages 168P
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 2
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Author: SANJEEV RANJAN

संजीव रंजन जन्म : 20 मई,1965, मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार। पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. कैरियर की शुरुआत विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन से। फिर अंग्रेज़ी मासिक ‘आर्ट ऐंड कल्चर - न्यू ट्रेडिशंस’ का प्रकाशन। कालांतर में ‘मीनिंग मैज़िक’ डिज़ाइन हाउस की स्थापना जिसके तहत विभिन्न मंत्रालयों और कारपोरेट संस्थानों के ऐनुअल रिपोर्ट्स, कॉफ़ी-टेबल बुक्स व अन्य प्रचार सामग्री का प्रकाशन। 2005 के मध्य से डीपीटी की अंग्रेज़ी त्रैमासिक ‘थिंक इंडिया’ के सम्पादन और प्रकाशन की ज़िम्मेदारी मिली। 2005 से 2019 के बीच ‘थिंक इंडिया’ के पचीस अंक प्रकाशित किए। सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन।

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