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Rudali-Hard Cover

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9788171197675
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‘रुदाली’ बांग्ला की विख्यात लेखिका महाश्वेता देवी की एक प्रसिद्ध कहानी पर आधारित नाटक है। अनेक मंचों पर सफलतापूर्वक खेले जा चुके इस नाट्य रूपांतर की लोकप्रियता आज भी उतनी ही है। नाटक का केन्द्रीय चरित्र सनीचरी है जिसे शनिवार के दिन पैदा होने के कारण यह नाम मिला है और इसके साथ मिली हैं कुछ सजाएँ - समाज मानता है कि वह असगुनी है और इसीलिए उसके परिवार में कोई नहीं बच पाया। एक-एक करके सब काल की भेंट चढ़ गए। लेकिन सनीचरी की आँखें कभी नम न हुईं। वह कभी नहीं रोई, जब बेटा मरा तब भी नहीं। लेकिन अंततः उसे रुदाली का काम करना पड़ता है, रुदाली यानी वह स्त्री जो भाड़े पर रोती है, मेहनताना लेकर मातम करती है। एक पात्र के रूप में सनीचरी उस तबके का प्रतिनिधित्व करती है जिसके पास न चुनाव की स्वतंत्रता होती है, न निश्चिंत होने के साधन, लेकिन वह कभी टूटती नहीं, उसकी जिजीविषा बराबर उसके साथ होती है। वह अपना सहारा खुद बनती है, जो जाहिर है कि उसका अन्तिम विकल्प होता है। समाज के निम्नतम वर्ग में स्त्री-जीवन की एक लोमहर्षक विडम्बना को रेखांकित करता यह नाटक शिल्प के स्तर पर भी एक सम्पूर्ण नाट्य-कृति है।

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Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2004
Edition Year 2025, Ed. 4th
Pages 104p
Price ₹495.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1
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Usha Ganguli

Author: Usha Ganguli

उषा गांगुली

वरिष्ठ रंगकर्मी, अभिनेत्री व निर्देशक। कोलकाता की विख्यात नाट्य-संस्था ‘रंगकर्मी’ की संस्थापक।

अभिनय व निर्देशन आदि के लिए अनेक सम्मानित पुरस्कारों से विभूषित, जिनमें प्रमुख हैं: संगीत नाटक अकादमी अवार्ड (1998), ‘गुड़ियाघर’ नाटक के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री अवार्ड (1982), ‘महाभोज’ के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन अवार्ड, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक अवार्ड तथा 1997 में सफदर हाशमी अवार्ड।

बांग्लादेश व अमेरिका में नाटकों का मंचन।

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