Premchand : Ek Vivechan

Author: Indranath Madan
You Save 35%
Out of stock
Only %1 left
SKU
Premchand : Ek Vivechan

प्रेमचन्द हिन्दी के ऐसे श्रेष्ठतम उपन्यासकार हैं, जिनके ग्रन्थों में दमन और उत्पीड़न के युग के समाज की अवस्था का यथार्थ चित्रण और प्रतिबिम्ब मिलता है। उन्होंने उन समस्याओं और मान्यताओं का स्पष्ट चित्र अंकित किया है जो मध्यवर्ग, ज़मींदार, पूँजीपति, किसान, मज़दूर, अछूत और समाज से बहिष्कृत व्यक्तियों के जीवन को संचालित करती हैं। उन्होंने किसानों के मानसिक गठन और मध्यवर्ग के दृष्टिकोण को उस समय गम्भीर विश्वास और उत्साह के साथ वाणी दी, जिस समय इस देश के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन हो रहे थे। जिस वर्ग-संघर्ष को उन्होंने अपने उपन्यासों और कहानियों में स्पष्टता से चित्रित किया है, उसी वर्ग-संघर्ष की दृष्टि से प्रस्तुत पुस्तक में उनकी कला का विवेचन और उनके मस्तिष्क का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है। प्रेमचन्द के समस्त उपन्यासों और कुछ प्रतिनिधि कहानियों का अध्ययन प्रस्तुत करनेवाली महत्त्वपूर्ण पुस्तक है यह।

 

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1989
Edition Year 2018, Ed. 5th
Pages 264p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 18.5 X 12.5 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Premchand : Ek Vivechan
Your Rating
Indranath Madan

Author: Indranath Madan

इन्द्रनाथ मदान

 

हिन्‍दी साहित्य में समीक्षा को एक नया आयाम देने वाले समीक्षकों में प्रसिद्ध नाम। पंजाब यूनीवर्सिटी में हिन्‍दी विभाग के प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष रहे।

प्रकाशित प्रमुख कृतियाँ हैं—‘आधुनिकता और हिन्‍दी साहित्‍य’, ‘आधुनिकता और हिन्‍दी आलोचना’, ‘आधुनिकता और हिन्‍दी उपन्‍यास’, ‘प्रेमचंद : एक विवेचना’, ‘आधुनिकता और सृजनात्‍मक साहित्‍य’, सं. : ‘महादेवी : चिन्‍तन और कला’, सं. : ‘निराला’ आदि।

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top