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Islam Ka Janma Aur Vikas

Translator: Rashmi Vajpeyi
Editor: Naresh 'Nadeem'
Edition: 2024, Ed. 4th
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Islam Ka Janma Aur Vikas

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आरम्भिक काल में इस्लामी आन्दोलन समाज के कमज़ोर और पीड़ित व्यक्तियों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता था। इसलिए यह जाँच–परख दिलचस्पी से ख़ाली नहीं होगी कि उसके आरम्भिक समर्थक कौन से लोग थे। अब्दुल–मुतअल–अस्सईदी नाम के एक मिस्री लेखक ने इस पर शोधकार्य किया है। वे कहते हैं कि नवस्थापित इस्लाम मूलत: युवकों का आन्दोलन था। जिन लोगों की उम्रें दर्ज मिलती हैं, उनमें एक बड़ा बहुमत हिजरत के समय 40 से कम उम्र का था। इन लोगों ने उससे कम–से–कम 8 या 10 साल पहले इस्लाम अपनाया था। पैग़म्‍बर मुहम्मद ने मक्का के अमीरों की जो तम्बीह की थी कि वे ज़ख़ीराबाज़ी न करें और अपनी दौलत पर न इठलाएँ, वह कुचले हुए लोगों, ग़ुलामों और यतीमों आदि को आकर्षक लगती थी। फिर भी उनके समर्थक सिर्फ़ इन्हीं वर्गों से नहीं आए। वे सभी ख़ाली हाथ लोग या ज़ोरदार क़बीलाई सम्बद्धताओं से वंचित तलछटिए लोग नहीं थे। वास्तव में उनमें से बहुत से लोग अग्रणी क़बीलों के थे। जिस तरह हमारे अपने वक्‍़त में सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक मगर वंचित होने के अहसास से भरे मध्यवर्गीय बुद्धिजीवी सामाजिक रूपान्तरण में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उसी तरह पैग़म्‍बर मुहम्मद के अनुयायियों ने भी निभाई। ये लोग भी मक्का के समाज के मध्यवर्ती स्तरों से ताल्लुक़ रखते थे जहाँ एक ख़ासी बड़ी सीमा तक शत्रुतापूर्ण वर्गीय सम्बन्ध पैदा हो चुके थे।  

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Rashmi Vajpeyi
Editor Naresh 'Nadeem'
Publication Year 2002
Edition Year 2024, Ed. 4th
Pages 192p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Asghar Ali Engineer

Author: Asghar Ali Engineer

असग़र अली इंजीनियर

जन्म : 10 मार्च 1939; सालुम्‍बर, राजस्थान।

प्रख्यात चिन्‍तक तथा प्रगतिशील विचारक। धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के हित में संघर्ष के लिए एक सर्वज्ञात नाम। ‘इस्लाम एंड इट्स रेलेवेंस टु अवर एज’ समेत 50 से ज्‍़यादा पुस्‍तकें प्रकाशित।  मुम्‍बई स्थित ‘सेंटर फ़ॉर स्टडी ऑफ़ सोसायटी एंड सेक्युलरिज़्म’ के अध्यक्ष थे। डॉ. इंजीनियर ने विक्रम विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में बी.एससी. किया था। शिक्षा-ग्रहण करने के बाद उन्‍होंने लगभग 20 सालों तक बृहन्मुम्बई नगर निगम (बीएमसी) में अपनी सेवाएँ दीं। 1980 से उन्होंने ‘इस्लामिक परिप्रेक्ष्य’ पत्रिका का सम्‍पादन करना शुरू किया था। 

निधन : 14 मई, 2013; सान्‍ताक्रूझ, मुम्‍बई।

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