Paise Se Parmatma Ki Or

Self-Help
Author: Swami Parmanand
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Paise Se Parmatma Ki Or

“पैसे का सर्वोत्तम संस्कारित समान्तर लक्ष्मी है। लक्ष्मी का उद्देश्य है नारायण को वरण करना। यदि कोई नर, नारायण के गुणों को अपनाकर स्वयं नारायण बन जाता है तो सोने में सुहागा वाली बात चरितार्थ होती है, और अगर आप किसी कारणवश नारायण नहीं बन सकते हैं तो आप उनके घर जाकर उनका दर्शन कीजिए, उनसे मिलिए, उनका आशीर्वाद लीजिए। मैंने लक्ष्मी और नारायण दोनों का आवास बता दिया है। यह आपकी मर्ज़ी है, आप उनसे मिलना चाहते हैं अथवा नहीं।”

उपरोक्त कथन लेखक के हैं। यह पुस्तक सीधे तौर पर यह बताती है कि इस जीवन में रहकर भी आप परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं, आप जैसा जीवन जी रहे हैं, उसमें सन्तोष और आमदनी के स्रोत पैदा कीजिए। यह स्रोत ईमानदारी और मेहनत का होना चाहिए। आपको परमात्मा की अवश्य ही प्राप्ति होगी।

निस्‍सन्‍देह, जीवन-प्र‍बन्‍धन की एक बहुत ही महत्‍त्‍वपूर्ण पुस्‍तक है पैसे से परमात्‍मा की ओर

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2008
Edition Year 2008, Ed. 1st
Pages 175p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Editorial Review

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Swami Parmanand

Author: Swami Parmanand

स्वामी परमानन्द

पूर्वनाम : प्रो. परमानन्द राय।

जन्म : 18 नवम्बर, 1928; ग्राम+डाकरघर—बनहरा, वाया हवेली खड़गपुर, ज़िला—मुंगेर (बिहार)।

शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी. (दर्शनशास्त्र)।

अध्यापन : 1956 में रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनी में व्याख्याता पद पर नियुक्त हुए, प्रोफ़ेसर तथा विभागाध्यक्ष बने और 30 नवम्बर, 1990 को वहीं से अवकाश ग्रहण किया।

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