Parwati Tirkey
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पार्वती तिर्की
झारखंड के गुमला शहर में 16 जनवरी 1994 को जन्मी पार्वती तिर्की की आरम्भिक शिक्षा गुमला के ही जवाहर नवोदय विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल की और वहीं के हिन्दी विभाग से ‘कुडुख आदिवासी गीत : जीवन राग और जीवन संघर्ष’ विषय पर पी-एच.डी. की डिग्री ली।
कविता और लोकगीतों में उनकी विशेष अभिरुचि है। कहानियाँ भी लिखती हैं। एक कहानी ‘गिदनी’ ‘वागर्थ’ पत्रिका में छप चुकी है। ‘इंद्रधनुष’, ‘सदानीरा’, ‘समकालीन जनमत’, ‘हिन्दवी’, ‘प्रगतिशील हाँक’ आदि वेबपत्रिकाओं और ‘कृति बहुमत’, ‘देशज समकालीन’, ‘सदानीरा’ (एंथ्रोपोसीन अंक) आदि पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं।
‘फिर उगना’ पार्वती तिर्की का पहला कविता-संग्रह है।
फिलहाल राँची विश्वविद्यालय, राँची के राम लखन सिंह यादव कॉलेज, हिन्दी विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं।
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