यह पुस्तक हमें विचारोत्तेजना; रचनात्मक आस्वाद, इतिहास और समीक्षा की समग्रता से उत्सुक करती है। लेखिका गिरीश रस्तोगी ने कुछ नाटक चुने हैं। ये सभी महत्त्वपूर्ण नाटक हैं जिनसे न केवल हिन्दी नाट्य साहित्य में नये प्रतिमान बने बल्कि रंगमंच की उर्वरता, सक्रियता, त्वरा और आन्दोलनकारी प्रवृत्ति का भी इतिहास बना। इन नाटकों पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है लेकिन जब ये सब एक साथ एक जगह समग्र विचार-दृष्टि के साथ होते हैं तो उनकी दूरगामी अर्थ व्यंजनाएँ अधिक सार्थक होती हैं। कुछ नाटकों से ताज़गी आयी, कुछ से विवाद उठे, कुछ अनाम पड़े रह गये, कुछ देश-व्यापी रंगमंच और समीक्षा से नहीं जुड़ पाये – ऐसे अनेक प्रश्नों, अन्तर्विरोधों, साहित्य, रंगमंच, समीक्षा के उन मोड़ों-बिन्दुओं— क्रान्तिकारी परिवर्तनों से समूची दृष्टि सम्पन्नता के साथ यह पुस्तक पहचान कराती है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2002 |
| Edition Year | 2023, Ed. 5th |
| Pages | 280p |
| Price | ₹700.00 |
| Publisher | Lokbharti Prakashan |
| Dimensions | 21.5 X 14 X 1.5 |