Facebook Pixel
Author
Jaya Jadwani

Jaya Jadwani

1 Books

जया जादवानी

जया जादवानी पिछले तीन दशक से सृजनरत हैं। अब तक उनके तीन कविता-संग्रह—‘मैं शब्द हूँ’, ‘अनन्त सम्भावनाओं के बाद भी’, ‘उठाता है एक मुट्ठी ऐश्वर्य’; छह कहानी-संग्रह—‘मुझे ही होना है बार-बार’, ‘अन्दर के पानियों में कोई सपना काँपता है’, ‘उससे पूछो’, ‘समन्दर में सूखती नदी’, ‘ये कथाएँ सुनाई जाती रहेंगी हमारे बाद भी’, ‘अनकहा आख्यान’ और पाँच उपन्यास—‘तत्त्वमसि’, ‘मिठो पाणी खारो पाणी’, ‘कुछ न कुछ छूट जाता है’, ‘देह कुठरिया’, ‘काया’ प्रकाशित हैं। कुछ यात्रा-वृत्तान्त भी लिख चुकी हैं। सिन्धी में भी उनकी पाँच किताबें प्रकाशित हैं। उन्होंने ‘कृष्णमूर्ति टू हिमसेल्फ़’ और सिन्धी कविता-संग्रह ‘भगत’ का हिन्दी अनुवाद किया है। उनकी कई रचनाओं का अंग्रेज़ी, सिन्धी, उर्दू, पंजाबी, बांग्ला, मराठी और अन्य भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उनकी कहानी ‘अन्दर के पानियों में कोई सपना काँपता है’ पर टेलीफ़िल्म बनी है।

उन्हें ‘मुक्तिबोध सम्मान’, ‘कुसुमांजलि सम्मान’ और ‘कथाक्रम सम्मान’ समेत कई सम्मान प्राप्त हैं।

ई-मेल : [email protected]

Back to Top