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Kaun Taar Se Bini Chadariya-Paper Back

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‘कौन तार से बीनी चदरिया’ की पृष्ठभूमि सत्तर और बाद के दशकों में फैले लगभग तीस-बत्तीस वर्षों का कालखंड है जिसे जेपी आन्दोलन के लिए जाना जाता है। उपन्यास में इस आन्दोलन की सामाजिक-राजनीतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए इसमें सक्रिय ताक़तों के अन्तर्विरोधों, न्यस्त स्वार्थों, नेतृत्व की दिशाहीनता तथा संकीर्ण मानसिकता की पड़ताल भी की गई है। आन्दोलन के बाद मध्य बिहार में सदियों के अँधेरों में सिसकते एवं शोषण की चक्की में पिसते दबे-कुचले वर्गों के भीतर उबलती परिवर्तन की हुंकारों और आकांक्षाओं के उतार-चढ़ाव के कुछ चित्र भी इसमें हमें मिलते हैं और भीषण दैन्य, व्यवस्था-जन्य हिंसा और कठोर शासकीय दमन के बीच मानवीय जिजीविषा का अक्षय संगीत भी इस उपन्यास की पंक्तियों में हमें सुनाई देता है। क्रान्ति के नाम पर हिंसा की अन्धी सुरंगों में भटकाव के ख़तरों की निशानदेही भी इस आख्यान में की गई है। उपन्यास का मुख्य पात्र डॉक्टर अमिय न तो पूरा डॉक्टर है, न ही पूरा संन्यासी। जेपी के बुलावे पर बिहार आने के बाद मध्य बिहार की केवाल मिट्टी की गंध में रच-बस गया वह पात्र अमानुषिक यथार्थ के खिलाफ मानवीय गरिमा, न्याय और समानता का अलख जगाने में अपना पूरा जीवन खपा देता है। समर्पित युवाओं का एक बड़ा समूह भी उसके साथ खड़ा होता है जिनके लिए वह मित्र, दार्शनिक और पथ-प्रदर्शक के रूप में हमारे सामने उभरता है। संन्यास की दीक्षा लेने के बाद हिमालय की खोहों में ईश्वर की तलाश में भटका उसका यायावर मन अन्ततः ‘परायी पीर’ के विरुद्ध जन-संघर्षों में ही परम सत्य का दर्शन पाता है। किसी शैल्पिक प्रयोग में उलझे बगैर यह उपन्यास एक सहज और पठनीय कथात्मकता का निर्माण करता है और पाठक को एक विशेष समय-खंड में ले जाकर मानवीय उदात्तता और संघर्षशीलता का एक जिम्मेदार सामाजिक-राजनीतिक पाठ बुनता है।
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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2022
Edition Year 2022, Ed. 1st
Pages 408p
Price ₹399.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2.5
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Vyas Mishra

Author: Vyas Mishra

व्यास मिश्र

जन्म : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के गाँव अमृत पाली में 22 फरवरी, 1955 को हुआ। साहित्यिक अभिरुचि बचपन से ही।

शिक्षा : 1976 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बिजिनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातकोत्तर। सरकारी सेवा में आने के बाद 1995 में पटना विश्वविद्यालय से क़ानून की डिग्री।

1980 में आई.पी.एस. में चयनित। दो वर्षों तक पुलिस प्रशासक के रूप में सेवा। 1982 से भारतीय प्रशासनिक सेवा में। बिहार एवं केन्द्र सरकार के विभिन्न महकमों/मंत्रालयों में अनेक पदों पर रहे। वर्तमान में केन्द्र सरकार के भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के सचिव के रूप में नई दिल्ली में पदस्थापित। जनपक्षधर, ईमानदार, कर्मठ, संवेदनशील अधिकारी के रूप में बिहार के दूर-दराज़ गाँवों तक चर्चित।

कृतियाँ : विभिन्न विषयों पर पत्र-पत्रिकाओं में लेख, निबन्‍ध और कविताएँ प्रकाशित। प्राथमिक शिक्षा पर ‘गहरे पानी पैठ’ पुस्‍तक राजकमल प्रकाशन से वर्ष 2000 में प्रकाशित। 'अगिन पाथर’ पहला लेकिन बहुचर्चित उपन्‍यास।

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