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Author
Vishwambharnath Sharma 'Kaushik'

Vishwambharnath Sharma 'Kaushik'

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विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ का जन्म 10 मई, 1891 को अम्बाला, पंजाब में हुआ था। वे प्रेमचन्द परम्परा के ख्याति प्राप्त कहानीकार हैं। विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ का दृष्टिकोण भी आदर्शोन्मुख यथार्थवादी था। उन्होंने हिन्दी, संस्कृत, उर्दू और फारसी भाषाओं के साथ मैट्रिक की परीक्षा पास की। प्रेमचन्द की तरह उन्होंने भी उर्दू में लेखन की शुरुआत की पर जल्दी ही वे हिन्दी में आ गए। उनकी पहली कहानी ‘रक्षाबन्धन’ ‘सरस्वती पत्रिका’ में 1913 में प्रकाशित हुई थी। उनकी कहानियों में भारतीय परिवारों के विविध रूपों को देखा जा सकता है जहाँ वे अपने चरित्रों के मनोविज्ञान में गहरे उतरकर उन्हें रचते हैं। ‘गल्प मन्दिर’, ‘चित्रशाला’, ‘प्रेम प्रतिज्ञा’, ‘मणि माला’, ‘कल्लोल’, ‘खोटा बेटा’, ‘बन्ध्या’, ‘पेरिस की नर्तकी’, ‘साध की होली’, ‘अप्रैल फूल’ (कहानी-संग्रह); ‘माँ’, ‘भिखारिणी’, ‘संघर्ष’ (उपन्यास); ‘दुबेजी की चिट्ठियाँ’, ‘दुबेजी की डायरी’ (व्यंग्य-संग्रह) उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उन्होंने ‘हिन्दी मनोरंजन’ पत्रिका का सम्पादन भी किया। 10 दिसम्बर, 1945 को उनका निधन हुआ।

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