Rekhta Ke Daag/Rekhta Ke Momin/Rekhta Ke Insha

shayari
500%
() Reviews

From ₹159.20 Regular Price ₹199.00

To ₹477.60 Regular Price ₹597.00

In stock

SKU
Rekhta Combo
Customize Rekhta Ke Daag/Rekhta Ke Momin/Rekhta Ke Insha

* Required Fields

Your Customization
Rekhta Ke Daag/Rekhta Ke Momin/Rekhta Ke Insha
Rekhta Ke Daag/Rekhta Ke Momin/Rekhta Ke Insha

In stock

- +

₹159.20

Summary
    "रेख़्ता क्लासिक्स" सीरीज़ उर्दू के क्लासिकी शायरों के प्रतिनिधि शायरी को नए पाठकों तक पहुँचाने के एक अनूठा प्रयास है। प्रस्तुत किताब में शेख़ इब्राहीम ज़ौक़ की प्रतिनिधि शायरी है जिसका संकलन फ़रहत एहसास साहब ने किया है।
    More Information
    Language Hindi
    Format Paper Back
    Publication Year 2022
    Edition Year 2021, Ed. 1st
    Pages 462
    Translator Not Selected
    Editor Not Selected
    Publisher Rajkamal Prakashan - Rekhta Books
    Dimensions 21.5 X 14 X 3
    Write Your Own Review
    You're reviewing:Rekhta Ke Daag/Rekhta Ke Momin/Rekhta Ke Insha
    Your Rating

    Editorial Review

    It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

    Farhat Ehsas

    Author: Farhat Ehsas

    फ़रहत एहसास

    फ़रहत एहसास (फ़रहतुल्लाह ख़ाँ) बहराइच (उत्तर प्रदेश) में 25 दिसम्बर, 1950 को पैदा हुए। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्ति के बाद 1979 में दिल्ली से प्रकाशित उर्दू साप्ताहिक ‘हुजूम' का सह-सम्पादन। 1987 में उर्दू दैनिक ‘क़ौमी आवाज़’ दिल्ली से जुड़े और कई वर्षों तक उसके इतवार एडिशन का सम्पादन किया जिससे उर्दू में रचनात्मक और वैचारिक पत्रकारिता के नए मानदंड स्थापित हुए। 1998 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली से जुड़े और वहाँ से प्रकाशित दो शोध-पत्रिकाओं (उर्दू, अंग्रेज़ी) के सह-सम्पादक के तौर पर कार्यरत रहे। इसी दौरान उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो और बी.बी.सी. उर्दू सर्विस के लिए कार्य किया और समसामयिक विषयों पर वार्ताएँ और टिप्पणियाँ प्रसारित कीं। फ़रहत एहसास अपने वैचारिक फैलाव और अनुभवों की विशिष्टता के लिए जाने जाते हैं। उर्दू के अलावा, हिन्दी, ब्रज, अवधी और अन्य भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी व अन्य पश्चिमी भाषाओं के साहित्य के साथ गहरी दिलचस्पी। भारतीय और पश्चिमी दर्शन से भी अन्तरंग वैचारिक सम्बन्ध।

    सम्प्रति : ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन' में मुख्य सम्पादक के पद पर कार्यरत।

    Read More
    Books by this Author

    Back to Top