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Pratinidhi Kahaniyan ; shani-Paper Back

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9788126701995
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शानी हिन्‍दी साहित्‍य के एक विरल कथाकार हैं। अनछुए-अनदेखे यथार्थ को एक बड़े कैनवस पर रचने के लिए शानी के पास जो विज़न था, वह विघटन के इस दौर में आज भी उतना ही महत्‍त्‍वपूर्ण है। उसे प्रस्‍तुत संग्रह की इन प्रतिनिध कहानियों में भी साफ़ देखा जा सकता है। एक तरफ़ उन्होंने 'जनाजा', 'युद्ध', 'जली हुई रस्सी', सरीखी रचनाओं के ज़रिए विभाजन के बाद से अपने में चन्द मुस्लिम समाज के बहुत सारे डर, असमंजस और विरोधाभास हमारे सामने रखे हैं, तो दूसरी ओर 'जहाँपनाह जंगल' जैसी दुनिया उद्‌घाटित की है और 'परस्त्रीगमन' जैसा नजरिया पेश किया है। उनकी कहानियों में हमें अपने भीतर की वह दबी हुई चीख़ सुनाई पड़ती है, जिसे हम रोज़ मुल्लवी करते चलते थे। साथ ही, उनकी दूरबीनी नज़र के सामने हम अपने कार्यकलापों को बौना, व्यर्थ और क्षणभंगुर होता हुआ भी पाते हैं। संक्षेप में, उनके पाठकों को कहीं छुटकारा नहीं है—हर हालत में वे पात्रों की नियति के सहभोगी हैं—उसमें विद्रूप हो, व्यंग्‍य हो या कभी न भुलाया जानेवाला अपमान।

शानी के रचना-संसार से अपरिचित पाठकों के लिए यह संकलन यक़ीनन प्रतिनिधि सिद्ध होगा।

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Language English
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1987
Edition Year 2019, Ed. 6th
Pages 160p
Price ₹75.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18.5 X 12.5 X 1.5
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Shani

Author: Shani

शानी

जन्म : 16 मई, 1933; जगदलपुर (मध्य प्रदेश)।

पूरा नाम : गुलशेर ख़ान ‘शानी’। समकालीन कथाकारों में विशेष रूप से समादृत।

शिक्षा पूरी करने के बाद वर्षों तक मध्य प्रदेश शासन के अन्तर्गत कार्य। मध्य प्रदेश साहित्य परिषद, भोपाल के सचिव पद पर रहे। ‘साक्षात्कार’ के संस्थापक-सम्पादक। तत्पश्चात् दिल्ली आकर ‘नवभारत टाइम्स’ में सहायक सम्पादक रहे। बाद में ‘साहित्य अकादेमी’, नई दिल्ली से सम्बद्ध। अकादेमी से प्रकाशित ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ के संस्थापक-सम्पादक।

अनेक भारतीय भाषाओं के अलावा रूसी तथा लिथुवानी भाषा में रचनाएँ अनूदित।

प्रकाशित पुस्तकें : ‘साँप और सीढ़ी’, ‘फूल तोड़ना मना है’, ‘एक लडक़ी की डायरी’, ‘काला जल’ (उपन्यास); ‘बबूल की छाँव’, ‘डाली नहीं फूलती’, ‘छोटे घेरे का विद्रोह’, ‘एक-से मकानों का नगर’, ‘युद्ध’, ‘शर्त का क्या हुआ?’, ‘बिरादरी’, ‘सडक़ पार करते हुए’ (कहानी-संग्रह) तथा ‘शालवनों का द्वीप’ (संस्मरण)।

निधन : 10 फरवरी, 1995

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