Maila Anchal/Kashi Ka Assi/Upsanhar/Kasap

Fiction : Novel,Special Combos
500%
() Reviews

From ₹159.20 Regular Price ₹199.00

To ₹938.20 Regular Price ₹1,198.00

In stock

SKU
Beseller Offer-6
Customize Maila Anchal/Kashi Ka Assi/Upsanhar/Kasap

* Required Fields

Your Customization
Maila Anchal/Kashi Ka Assi/Upsanhar/Kasap
Maila Anchal/Kashi Ka Assi/Upsanhar/Kasap

In stock

- +

₹159.20

Summary
    More Information
    Language Hindi
    Format Hard Back, Paper Back
    Pages 501
    Translator Not Selected
    Editor Not Selected
    Publisher Rajkamal Prakashan
    Write Your Own Review
    You're reviewing:Maila Anchal/Kashi Ka Assi/Upsanhar/Kasap
    Your Rating

    Editorial Review

    It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

    Kashinath Singh

    Author: Kashinath Singh

    काशीनाथ सिंह

    जन्म : 1 जनवरी, 1937; बनारस ज़िले के जीयनपुर गाँव में।

    शिक्षा : आरम्भिक शिक्षा गाँव के पास के विद्यालयों में। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. (1959) और पीएच.डी. (1963)।

    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफ़ेसर एवं विभागाध्यक्ष रहे।

    पहली कहानी ‘संकट’ ‘कृति’ पत्रिका (सितम्बर, 1960) में प्रकाशित।

    कृतियाँ : ‘लोग बिस्तरों पर’, ‘सुबह का डर’, ‘आदमीनामा’, ‘नई तारीख’, ‘सदी का सबसे बड़ा आदमी’, ‘कल की फटेहाल कहानियाँ’, ‘कहानी उपख्यान’, ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘घोआस’ (नाटक); ‘हिन्दी में संयुक्त क्रियाएँ’ (शोध); ‘आलोचना भी रचना है’ (समीक्षा); ‘काशी का अस्सी’, ‘रेहन पर रग्घू’, ‘महुआचरित’, ‘उपसंहार’ (उपन्यास); ‘याद हो कि न याद हो’, ‘आछे दिन पाछे गए’, ‘घर का जोगी जोगड़ा’ (संस्मरण); ‘गपोड़ी से गपशप’ (साक्षात्कार)।

    ‘अपना मोर्चा’ का जापानी एवं कोरियाई भाषाओं में अनुवाद। जापानी में कहानियों का अनूदित संग्रह। कई कहानियों के भारतीय और अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद। उपन्यास और कहानियों की रंग-प्रस्तुतियाँ। ‘तीसरी दुनिया’ के लेखकों-संस्कृतिकर्मियों के सम्मेलन के सिलसिले में जापान-यात्रा (नवम्बर, 1981)।

    सम्मान : ‘रेहन पर रग्घू’ उपन्यास के लिए ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘भारत भारती पुरस्कार’, ‘कैफ़ी आज़मी अवार्ड’, ‘कथा सम्मान’, ‘समुच्चय सम्मान’, ‘शरद जोशी सम्मान’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘रचना समग्र पुरस्कार’ आदि।

    सम्प्रति : बनारस में रहकर स्वतंत्र लेखन।

    Read More
    Books by this Author

    Back to Top