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Ek Lambi Chhanha-Hard Cover

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...इधर मैं आपके लन्दन और वेल्ज़ वाले यात्रा-वृत्तान्त शौक़ से पढ़ता रहा हूँ। आप हर स्थिति और दृश्य को कितनी उत्सुकता से देखते हैं और कितनी गहराई से ग्रहण करते हैं...

—कृष्ण बलदेव वैद

...आपका यात्रा-वृत्तान्त मुझे बहुत अच्छा लगा। इसका एक बहुत नकारात्मक कारण यह है कि मैंने सोचा था, इसमें औपन्यासिकता का रस नहीं होगा और बोझिल होगा। मगर इसमें आनन्द और रस भरपूर है, बोझिल बिलकुल भी नहीं। श्रद्धेय वात्स्यायनजी और निर्मल वर्मा के यात्रा-वृत्तान्तों से एकदम भिन्न रस का यात्रा-वृत्तान्त है।...

—अशोक सेकसरिया

...पिछले सप्ताह से मैं रह-रह कर आपके साथ आयरलैंड के वन्य स्थलों के सन्नाटे, झीलों पर उड़ते हंसों, डब्लिन की सड़कों-पबों का मूक—ईर्ष्यालु पाठक—साक्षी रहा हूँ। मैंने मुद्दत पुरानी येट्स की कविताओं की पुस्तक भी पास रख ली थी और जब आप अपने संस्मरण में किसी कविता का अंश उद्धृत करते तो तुरन्त मैं एक उत्सुक-उत्तेजित पाठक-पर्यटक के उत्साह की रौ में उसे पुस्तक में पूरा का पूरा पढ़ने का आनन्द लेता। आपने ‘इनिस्क्री के द्वीप’ की अखंड निःस्तब्धता और कूल पार्क के सात वनों की जो छवि आँकी है, वह अपने आपमें बेजोड़ है। हमारे दार्शनिक मित्र दयाजी को जब कोई चीज़ या कोई कही हुई बात अच्छी लगती थी तो वह बच्चों की तरह ताली बजाते थे। आपके आयरलैंड के संस्मरणों को पढ़ते हुए हर दूसरे पृष्ठ पर ताली बजाने को मन करता है। इस बीच अन्य पत्रिकाओं में भी आपके यात्रा-वृत्त पढ़ता रहा हूँ। पर आपने आयरलैंड और येट्स के बारे में जो डूबकर लिखा है, वह अद्वितीय है।...

—निर्मल वर्मा

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Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2000
Edition Year 2024, Ed. 2nd
Pages 191p
Price ₹795.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
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Rameshchandra Shah

Author: Rameshchandra Shah

रमेशचन्द्र शाह

रमेशचन्द्र शाह का जन्म सन् 1937 में वैशाखी त्रयोदशी को अल्मोड़ा, उत्तर प्रदेश में हुआ। प्रयाग विश्वविद्यालय से उच्‍च शिक्षा पाई। हमीदिया कॉलेज, भोपाल के अंग्रेज़ी विभाग में सेवाएँ दीं। भोपाल में 'निराला सृजनपीठ' के निदेशक रहे।
इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं–'गोबरगणेश', 'क़िस्सा ग़ुलाम' (आठ भारतीय भाषाओं में अनूदित), 'पूर्वापर', 'आख़िरी दिन', 'पुनर्वास', 'आप कहीं नहीं रहते विभूति बाबू', 'असबाब-ए-वीरानी' (उपन्यास); 'जंगल में आग', 'मुहल्ले का रावण', 'मानपत्र', 'थिएटर', 'प्रतिनिधि कहानियाँ' (कहानी-संग्रह); 'कछुए की पीठ पर', 'हरिश्चन्द्र आओ', 'नदी भागती आई', 'प्यारे मुचकुन्द को', 'चाक पर समय' तथा 'देखते हैं शब्द भी अपना समय' (कविता-संग्रह); 'मारा जाई ख़ुसरो' (नाटक); 'शैतान के बहाने', 'रचना के बदले', 'पढ़ते-पढ़ते', 'सबद निरन्तर', 'आड़ू का पेड़', 'स्वधर्म और कालगति', 'स्वाधीन इस देश में' (निबन्ध-संग्रह); 'छायावाद की प्रासंगिकता', 'समानान्तर', 'वागर्थ', 'भूलने के विरुद्ध', 'अज्ञेय : वागर्थ का वैभव', 'अज्ञेय का कवि-कर्म', 'आलोचना का पक्ष', 'समय-संवादी' (समालोचना); 'अज्ञेय : काव्य-स्तबक', 'जड़ की बात' (जैनेन्द्र के निबन्ध), 'प्रसाद रचना-संचयन' (सम्पादन); 'अकेला मेला', 'इस खिड़की से' (डायरी); 'बहुवचन' में दो यात्रा-वृत्तान्त संकलित तथा 'एक लम्बी छाँह' (यात्रा-वृत्तान्त); 'मटियाबुर्ज' ('राशोमन' का अनुवाद), 'दस स्पोक भर्तृहरि' (भर्तृहरिशतक का अंग्रेज़ी पद्यानुवाद) एवं कविताओं की चार पुस्तिकाएँ 'तनाव' पुस्तकमाला के अन्तर्गत प्रकाशित (अनुवाद); कई कविता एवं नाट्य-पुस्तकें (बाल-साहित्य)।
अंग्रेज़ी में : 'येट्स एंड एलियट : पर्सपैक्टिव्ज़ ऑन इंडिया', 'जयशंकर प्रसाद' तथा टेमेनोए अकादमी, लन्दन द्वारा चार व्याख्यानों की पुस्तिका प्रकाशित।
सम्मान : 'शिखर-सम्मान' (मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग), 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार', 'व्यास सम्मान', 'पद्मश्री', 'भवानीप्रसाद मिश्र पुरस्कार', 'महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार', 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' तथा भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता  द्वारा सम्मानित।
सम्पर्क : एम-4, निराला नगर, भदभदा रोड, भोपाल (म.प्र.)।
ई-मेल : [email protected]

 

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