Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat/Meri Aatmakatha/Main Bonsai Apane Samay Ka/Komal Gandhar

Autobiography,Book Fair Combo
500%
() Reviews

From ₹250.00

To ₹1,447.00

In stock

SKU
Special Offer-2
Customize Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat/Meri Aatmakatha/Main Bonsai Apane Samay Ka/Komal Gandhar

* Required Fields

Your Customization
Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat/Meri Aatmakatha/Main Bonsai Apane Samay Ka/Komal Gandhar
Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat/Meri Aatmakatha/Main Bonsai Apane Samay Ka/Komal Gandhar

In stock

- +

₹250.00

Summary
    More Information
    Language Hindi
    Format Hard Back, Paper Back
    Pages 502
    Translator Not Selected
    Editor Not Selected
    Publisher Rajkamal Prakashan
    Write Your Own Review
    You're reviewing:Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat/Meri Aatmakatha/Main Bonsai Apane Samay Ka/Komal Gandhar
    Your Rating

    Editorial Review

    It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

    Khushwant Singh

    Author: Khushwant Singh

    खुशवन्त सिंह

    जन्म : 15 अगस्त, 1915, हडाली (अब पाकिस्तान में)। 

    शिक्षा : लाहौर से स्नातक तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से एल.एल.बी.।

    1939 से 1947 तक लाहौर हाईकोर्ट में वकालत की। विभाजन के बाद भारत की राजनयिक सेवाके अन्तर्गत कनाडा में इन्फ़ॉर्मेशन अफ़सरतथा इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त के प्रेस अटैचीरहे। कुछ वर्षों तक प्रिंस्टन तथा स्वार्थमोर विश्वविद्यालयों में अध्यापन भी किया।

    भारत लौटकर नौ वर्षों तक इलस्ट्रेटेड वीकलीतथा तीन वर्षों तक हिन्दुस्तान टाइम्सका कुशल सम्पादन किया। हिन्दुस्तान टाइम्सतथा संडेके लिए नियमित रूप से क्रमश : विद मैलिस टुवड्र र्स वन एंड ऑलएवं गॉसिप, स्वीट एंड सॉरलिखते रहे तथा पेंगुइन बुक्स इंडियामें सलाहकार सम्पादक के पद पर भी कार्यरत रहे।

    प्रमुख कृतियाँ : पाकिस्तान मेल, मेरा लहुलूहान पंजाब, सच प्यार और थोड़ी सी शरारत, मृत्यु मेरे द्वार पर, प्रतिनिधि कहानियाँ, हिस्ट्री ऑफ सिख्स के दो खंड तथा रंजीत सिंह। अनेक लेखमालाओं के अतिरिक्त उर्दू और पंजाबी में कई अनुवाद भी किए।

    1980 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। 1974 में पद्मभूषणकी उपाधि मिली, जिसे ऑपरेशन ब्लू स्टारके खिलाफ गुस्सा जताते हुए लौटा दिया।

    निधन : 20 मार्च, 2014

    Read More
    Books by this Author

    Back to Top