Aameen

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आलोक श्रीवास्तव के पहले और बहुचर्चित गज़ल-संग्रह ‘आमीन’ का यह पाँचवाँ संस्करण है। पन्नों के कैनवस पर शब्दों के रंग बिखेरने में माहिर आलोक नए दौर और आमफहम ज़बान के शायर हैं। उन्होंने काव्य की हर विधा में निपुणता का परिचय देते हुए कहीं किसी सूफ़ियाना ख़याल को सिर्फ़ एक दोहे में समेट देने के हुनर से रू-ब-रू कराया तो कहीं वे ‘अम्मा’ और ‘बाबूजी’ से जुड़े संजीदा रिश्तों की यादों को विस्तार देते नज़र आए। आधुनिकता के इस बेरुखे दौर में उनकी रचनाएँ रिश्तों के मर्म को समझने और समझाने की विनम्र कोशिश लेकर सामने आईं। हमारे समय की आलोचना के प्रतिमान डॉ. नामवर सिंह ने उन्हें ‘दुष्यंत की परम्परा का आलोक’ कहा तो हिन्दी और उर्दू के कई जाने-माने लेखकों, समीक्षकों के साथ साहित्य-सुधियों ने भी उनके इस संग्रह को हाथों-हाथ लिया। बाज़ारवादी युग में दरकते इन्सानी रिश्तों पर लिखी आलोक की ग़ज़लें उनके निजी अनुभवों का आईना हैं। ‘आमीन’ की कई रचनाओं में सामाजिक सरोकार के सबूत मिले, जिसने आलोक को सहज ही बेदार और प्रगतिशील कवियों की क़तार में ला खड़ा किया—वह क़तार जो हिन्दी ग़ज़ल और उर्दू ग़ज़ल की खेमेबंदी से परे सिर्फ़ और सिर्फ़ ग़ज़ल की हिफ़ाज़त कर रही है। ‘आमीन’ के प्रथम संस्करण की भूमिका शीर्ष लेखक कमलेश्वर ने लिखी जो किसी पुस्तक पर उनकी अन्तिम भूमिका के रूप में याद की जाती है और मशहूर शायर-फ़िल्मकार गुलज़ार के पेशलफ्ज़ ने इस पर एक मुकम्मल संग्रह होने की मुहर लगाई। दो भाषाओं का पुल बनानेवाले एक नौजवान के पहले संग्रह पर हिन्दी और उर्दू के दो शिखर क़लमकारों के शब्द इस बात की गवाही बने कि आलोक ने अपना अदबी इम्तेहान पूरी संजीदगी और तैयारी से दिया है, जो बहुत हद तक सही साबित हुई; वहीं दूसरे संस्करण की भूमिका डॉ. नामवर सिंह ने लिखी, इस शुभकामना के साथ कि ये रचनाएँ और दूर तक पहुँचें। आमीन!

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2007
Edition Year 2019, Ed. 5th
Pages 100p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21 X 14 X 1
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Editorial Review

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Aalok Shrivastava

Author: Aalok Shrivastava

आलोक श्रीवास्तव

कविता, कहानी, फ़िल्म-लेखन और टीवी पत्रकारिता का जाना-माना नाम।

शाजापुर (म.प्र.) में 30 दिसम्बर को जन्म। तीन दशक से ग़ज़लकार के रूप में प्रसिद्धि। सभी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। पहला ही गज़ल-संग्रह ‘आमीन’ सर्वाधिक चर्चित, लोकप्रिय व बहु-पुरस्कृत पुस्तकों में शामिल। ‘राजकमल’ से ही प्रकाशित ‘आफ़रीन’ नामक कथा-संग्रह के भी अब तक अनेक संस्करण। कई भारतीय व विदेशी भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद। उर्दू के ख्यात शायरों की पुस्तकों का सम्पादन। 

हिन्दी के अन्यतम युवा ग़ज़लकार जिनकी अनेक ग़ज़लों व नज़्मों को जगजीत सिंह, पंकज उधास, उस्ताद राशिद ख़ान, शुभा मुद्गल व रेखा भारद्वाज से लेकर महानायक अमिताभ बच्चन तक ने अपना स्वर दिया। भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकारों व पार्श्‍व गायकों ने भी कई गीतों व ग़ज़लों को स्वरबद्ध किया।

‘शब्दशिल्पी सम्मान’ (भोपाल), ‘हेमंत स्मृति कविता सम्मान’ (मुम्‍बई), ‘परम्परा ऋतुराज सम्मान’ (दिल्ली), मध्य प्रदेश साहित्य अकादेमी का ‘दुष्यन्त कुमार पुरस्कार’, ‘फ़िराक़ गोरखपुरी सम्मान’ (उदयपुर), मास्को (रूस) का ‘अंतर्राष्ट्रीय पुश्किन सम्मान’  सहित अमेरिका के वॉशिंगटन में ‘हिन्दी ग़ज़ल सम्मान’  व कथा यूके की ओर से ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ़  कॉमन्स  में सम्मानित हुए पहले युवा ग़ज़लकार।

अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोप, रूस, साउथ अफ़्रीका और यूएई सहित 15 से अधिक देशों की साहित्यिक यात्राएँ। 

सम्प्रति : टीवी पत्रकारिता और फ़िल्मों में सक्रिय लेखन।

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