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Pahali Umangen

Pahali Umangen

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  • Pages: 359p
  • Year: 2002
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: PU228
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    पहली उमंगें उपन्यास के घटना-क्रम की शुरुआत प्रथम विश्वयुद्ध की पूर्ववेला में, 1910 के आसपास वोल्गा के किनारे स्थित सरातोव नामक छोटे-से शहर में होती है। कहानी मुख्यतः एक युवा क्रान्तिकारी (इज्वेकोव) और एक प्रौढ़-परिपक्व बोल्शेविक कारखाना मजदूर (रागोजिन) की गतिविधियों के आसपास घूमती है, लेकिन इनके साथ ही क्रान्ति पूर्व रूस के विभिन्न वर्गों और संस्तरों के प्रतिनिधि अपनी सामाजिक स्थिति, मनोविज्ञान, राग-विराग और पारस्परिक सम्बन्धों के साथ अत्यन्त जीवन्त रूप में मौजूद हैं- व्यापारी मेरकूरी अव्देविच और उसकी बेटी लीजा, अभिजात लेखक पास्तुखोव, छलिया अभिनेता स्त्वेतुखिन, क्रान्ति के गुप्त सहयोगी बुद्धिजीवी और तलछट-निवासी लम्पट सर्वहारा चरित्र। टाइप चरित्रों के सृजन और विकास की फ़ेेदिन की तकनीक अनूठी है। सामान्य घटनाक्रम-विकास के बीच वे चरित्रों की परत-दर-परत खोलते हुए मानो उनका मनोवैज्ञानिक अध्ययन भी प्रस्तुत करते चलते हैं। काल-विशेष की सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों की वस्तुपरक प्रस्तुति, ऐतिहासिक घटना प्रवाह का व्यक्तियों पर प्रभाव और घटना-प्रवाह में व्यक्तियों की भूमिका तथा अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि चरित्रों की ऐतिहासिक नियति के चित्रण के साथ ही फ़ेेदिन जनता के बीच से उभरते प्रतिनिधि सकारात्मक चरित्रों की गतिकी को उद्घाटित करते हुए एक नये मानव के जन्म की कहानी बयान करते हैं। पहली उमंगें उपन्यास एक ऐसे समय का साहित्यिक दस्तावेज है जब समाज में, आतंक के साये के बीच, कभी भी कहीं से परिवर्तन की किसी विस्फोटक, आकस्मिक शुरुआत की सम्भावना लोग निरन्तर महसूस कर रहे थे। सतह पर सामान्य जीवन का दैनन्दिन नाटक जारी था और सतह के नीचे परिवर्तन की शक्तियाँ लगातार संगठित तैयारियों में जुटी हुई थीं। उपन्यास की अनेक थीमें इस विचार द्वारा एकताबद्ध हैं कि दुनिया को पुनर्संगठित करने का संघर्ष ही मूल्य और सत्यनिष्ठा से युक्त मानव-व्यक्तित्व का निर्माण कर सकता है, चीजों को बदलने की प्रक्रिया में ही लोग स्वयं को बदल सकते हैं और क्रान्ति के दहनपात्र में ही नया मानव ढाला-गढ़ा जा सकता है।

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    Konstantin Fedin

    जन्म: 24 फरवरी (पुराने कैलेण्डर के अनुसार 12 फरवरी), 1892, सरातोव, रूस। निधन: 15 जुलाई, 1977, मास्को, सोवियत संघ।

    समाजवादी क्रान्ति और निर्माण के युगान्तरकारी समय और महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के दौरान अकूत कुर्बानियाँ देकर फासीवाद को धूल चटाने वाली सोवियत जनता के भौतिक-आत्मिक जीवन के सभी पहलुओं का दक्ष साहित्यिक दस्तावेजीकरण करनेवाले लेखकों में कोन्स्तान्तिन फ़ेदिन का नाम अग्रणी है।

    एक छोटे व्यापारी के घर जन्मे फेष्दिन अध्ययन के लिए जर्मनी में थे जब प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान रूस वापस लौटते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वे अक्टूबर क्रान्ति के बाद ब्रेस्त-लितोव्स्क की सन्धि होने पर वापस लौट सके। गृहयुद्ध के दौरान के तूफानी वर्षों में फेष्दिन घुड़सवार फौज में शामिल होकर लड़े और सेना के अखबार में काम किया। 1921 से 1924 तक उन्होंने ‘किताबें और क्रान्ति’ पत्रिका के सम्पादक के रूप में काम किया। इस दौरान वे लेख और कहानियाँ लिखते रहे। 1921 में वे विभ्रमग्रस्त मध्यवर्गीय युवा रूसी लेखकों के ग्रुप ‘सेरापियन ब्रदर्स’ से जुड़ गए। गोर्की के प्रभाव में फ़ेदिन ने इस ग्रुप से अपने को दूर कर लिया और उनके वैचारिक रूपान्तरण की शुरुआत हुई।

    फ़ेदिन को साहित्य के लिए दो बार स्तालिन पुरस्कार के साथ चार बार लेनिन सम्मान और एक बार अक्टूबर क्रान्ति सम्मान भी मिला था। इसके अतिरिक्त उन्हें देश-विदेश में कई सम्मान और पद-पुरस्कार मिले थे। 1959 से 1971 तक वे सोवियत लेखक संघ के  प्रथम  सचिव  और  1971  से  उसके प्रशासकीय बोर्ड के अध्यक्ष रहे।

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