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Ateet Hoti Sadi Aur Stree Ka Bhavishya

Ateet Hoti Sadi Aur Stree Ka Bhavishya

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  • Pages: 287p
  • Year: 2018, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126701490
  •  
    लोकप्रिय कथा-मासिक हठ ने पिछले वर्षों में औरत उत्तरकथा और अतीत होती सदी और स्त्री का भविष्य नाम से विशेषांकों का आयोजन किया था । इस किताब की आधार सामग्री अतीत होती सदी और स्त्री का भविष्य विशेषांक से ली गई है । उपरोक्त विशेषांकों की अपार लोकप्रियता और अनुपलब्धता के मद्‌देनजर कुल सामग्री को पुस्तकाकार प्रकाशित करने की योजना को अमली जामा पहनाने के क्रम में यह किताब आपके हाथों में है । आज जब हम नई सदी में कदम रख चुके हैं, हमें हर क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों और अधूरे कामों की फेहरिस्त हर चंद अपने सामने रखनी चाहिए । बीती सदी की एक सतत्-सुदीर्घ जद्‌दोजहद के दौरान स्त्रियों ने अपने हार्दिक मनोभावों को अभिव्यक्त करने की जो बेचैन कोशिशें की हैं, उनसे गुलामी को स्थायित्व देने वाली नाना प्रकार की प्रवृत्तियाँ और शक्तियाँ बेपर्दा होती जाती हैं । पहली बार स्त्रियाँ उन समस्याओं पर उँगली रखने खुद सामने आई हैं जो सेक्स के आधार पर अलगाए जाने से जन्म लेती हैं । पुस्तक के शुरुआती खंड में शामिल आत्मकथ्यों पर नजर डालें तो पाएँगे कि वहाँ स्त्रियाँ अपनी आकांक्षाओं-स्वप्नों और संघर्षों की अक्कासी के लिए भाषा को एक नया हथियार बनाए मौजूद हैं-पर्दे और गुमनामियत से बाहर-पुरुषों की दया-सहानुभूति से परे । पितृ-सत्ता के षड्यंत्र और स्त्री छवि खंडों में दोनों दृष्टिकोणों को साथ-साथ रखकर जटिलता को उसके पूरेपन में पकड़ने की कोशिशें की गई हैं । यह सारा उद्यम इस एक संकल्प के इर्द-गिर्द है कि नई सदी में भारतीय समाज नए मूल्यों, नए सम्बन्धों, नए व्यवहार, नई मानसिकता की ओर अग्रसर होगा । आने वाली सदी में स्त्रियों की मुक्ति के सवालों के जवाब ही देश में आधुनिकता और विकास के चरित्र को तय करेंगे ।

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    Rajendra Yadav

    जन्म : 28 अगस्त, 1929, आगरा। शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), 1951, आगरा विश्वविद्यालय।

    प्रकाशित पुस्तकें : देवताओं की मूर्तियाँ, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, अभिमन्यु की आत्महत्या, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल और अपने पार, चौखटे तोड़ते त्रिकोण, वहाँ तक पहुँचने की दौड़, अनदेखे अनजाने पुल, हासिल और अन्य कहानियाँ, श्रेष्ठ कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ (कहानी-संग्रह); सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, शह और मात, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), मंत्र-विद्ध और कुलटा (उपन्यास); आवाज तेरी है (कविता-संग्रह); कहानी : स्वरूप और संवेदना, प्रेमचन्द की विरासत, अठारह उपन्यास, काँटे की बात (बारह खंड), कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति, उपन्यास : स्वरूप और संवेदना (समीक्षा-निबन्ध-विमर्श); वे देवता नहीं हैं, एक दुनिया : समानान्तर, कथा जगत की बागी मुस्लिम औरतें, वक्त है एक ब्रेक का, औरत : उत्तरकथा, पितृसत्ता के नए रूप, पच्चीस बरस : पच्चीस कहानियाँ, मुबारक पहला कदम (सम्पादन); औरों के बहाने (व्यक्ति-चित्र); मुड़-मुडक़े देखता हूँ... (आत्मकथा); राजेन्द्र यादव रचनावली (15 खंड)।

    प्रेमचन्द द्वारा स्थापित कथा-मासिक ‘हंस’ के अगस्त, 1986 से 27 अक्टूबर, 2013 तक सम्पादन। चेखव, तुर्गनेव, कामू आदि लेखकों की कई कालजयी कृतियों का अनुवाद।

    निधन : 28 अक्टूबर, 2013

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