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Uska Bachpan

Uska Bachpan

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  • Pages: 147p
  • Year: 2012
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126721924
  •  
    उसका बचपन एक महत्त्वपूर्ण उघैर असाधारण उपन्यास है और अपने शिल्प और शैली के आधार पर हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिना जाता है । इसमें एक संवेदनशील बच्चे के दृष्टिकोण से एक निर्धन परिवार के रोजमर्रा के जीवन और जोखिम को अनेक दृश्य खंडों में उभारा गया है । इसका छोटा सा संसार हमें विचलित भी करता है और एक गहरा आनन्द भी देता यथार्थ से लबालब होते हुए भी यह उपन्यास यथार्थवादी उपन्यासों की कई पुरानी लकीरों के इधर उधर होता हुआ आगे बढ़ता है । इसमें कोई एक कहानी नहीं, कोई बनावटी प्लाट नहीं । इसमें कृष्ण बलदेव वैद ने शब्दों का कहीं अपव्यय नहीं किया, न ही वे अतिभावुकता के शिकार हुए हैं । शिल्पगत आगाही और भाषागत ताजगी के लिहाज से श्री वैद का यह पहला उपन्यास एक आदर्श प्रस्तुत करता है । 1957 में अपने प्रथम प्रकाशन के समय उसका बचपन हिन्दी साहित्य की एक विशिष्ट घटना थी । इस संस्करण से उस घटना की याद ताजा हो जाएगी, ऐसी हमारी आशा है ।

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    Krishna Baldev Vaid

    जन्म: 27 जुलाई, 1927, डिंगा (पंजाब)। शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेज़ी), पंजाब विश्वविद्यालय (1949), पी-एच.डी., हार्वर्ड विश्वविद्यालय (1961)।

    अध्यापन: हंसराज कॉलिज, दिल्ली विश्वविद्यालय (1950- 62); अंग्रेज़ी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ (1962- 66); अंग्रेज़ी विभाग, न्यूयॉर्क स्टेट विश्वविद्यालय (1966- 85); अंग्रेज़ी विभाग, ब्रेंडाइज़ विश्वविद्यालय (1968-69)। अन्य अनुभव: अध्यक्ष, निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल (1985-88)।

    प्रकाशित कृतियाँ: उपन्यास: उसका बचपन, बिमल उपऱ्$ जाएँ तो जाएँ कहाँ, नसरीन, दूसरा न कोई, दर्द ला दवा, गुज़रा हुआ ज़माना, काला कोलाज, नर-नारी, मायालोक, एक नौकरानी की डायरी। कहानी-संग्रह: बीच का दरवाज़ा, मेरा दुश्मन, दूसरे किनारे से, लापता, उसके बयान, मेरी प्रिय कहानियाँ, वह और मैं, ख़ामोशी, आलाप, प्रतिनिधि कहानियाँ, लीला, चर्चित कहानियाँ, पिता की परछाइयाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, सम्पूर्ण कहानियाँ (दो जिल्दों में): मेरा दुश्मन, रात की सैर, बोधिसत्व की बीवी, ‘बदचलन’ बीवियों का द्वीप। नाटक: भूख आग है, हमारी बुढ़िया, सवाल और स्वप्न, परिवार अखाड़ा। समीक्षा: टेकनीक इन दि टेल्ज़ ऑफ़ हेनरी जेम्ज़।

    अनुवाद: अंग्रेज़ी में: स्टेप्स इन डार्कनेस (उसका बचपन), बिमल इन बाग (बिमल उपऱ्$ जाएँ तो जाएँ कहाँ), डाइंग अलोन (दूसरा न कोई और दस कहानियाँ), द ब्रोकन मिरर (गुज़रा हुआ ज़माना), सायलेंस (चुनी हुई कहानियाँ), इन द डार्क (मुक्तिबोध: अँधेरे में), फ़ायर इन दि बैली / आवर ओल्ड वोमन (भूख आग है / हमारी बुढ़िया)।

    हिन्दी में: गॉडो के इन्तज़ार में (बेकिट), आखि़री खेल (बेकिट), फ़ेड्रा (रासीन), एलिस अजूबों की दुनिया में (लुईस केरल)।

    अनेक रचनाओं के अनुवाद बंगला, उर्दू, गुजराती, तमिल, मलयाली, मराठी आदि अन्य भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी के अलावा जर्मन, इतालवी, हिस्पानवी, फ्रांसीसी, नार्विजियन, स्वीडिश और पोलिश में प्रकाशित हो चुके हैं।

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