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Aameen

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  • Pages: 100p
  • Year: 2019, 5th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126714308
  •  
    आलोक श्रीवास्तव के पहले और बहुचर्चित गज़ल-संग्रह ‘आमीन’ का यह पाँचवाँ संस्करण है। पन्नों के कैनवस पर शब्दों के रंग बिखेरने में माहिर आलोक नए दौर और आम फहम ज़बान के शायर हैं। उन्होंने काव्य की हर विधा में निपुणता का परिचय देते हुए कहीं किसी सूफियाना खय़ाल को सिर्फ एक दोहे में समेट देने के हुनर से रू-ब-रू कराया तो कहीं वे ‘अम्मा’ और ‘बाबूजी’ से जुड़े संजीदा रिश्तों की यादों को विस्तार देते नज़र आए। आधुनिकता के इस बेरुखे दौर में उनकी रचनाएँ रिश्तों के मर्म को समझने और समझाने की विनम्र कोशिश लेकर सामने आईं। हमारे समय की आलोचना के प्रतिमान डॉ. नामवर सिंह ने उन्हें ‘दुष्यंत की परंपरा का आलोक’ कहा तो हिन्दी और उर्दू के कई जाने-माने लेखकों, समीक्षकों के साथ साहित्य-सुधियों ने भी उनके इस संग्रह को हाथों-हाथ लिया । बाज़ारवादी युग में दरकते इन्सानी रिश्तों पर लिखी आलोक की गज़लें उनके निजी अनुभवों का आईना हैं। ‘आमीन’ की कई रचनाओं में सामाजिक सरोकार के सबूत मिले जिसने आलोक को सहज ही बेदार और प्रगतिशील कवियों की कतार में ला खड़ा किया—वह कतार जो हिन्दी गज़ल और उर्दू गज़ल की खेमेबंदी से परे सिर्फ और सिर्फ गज़ल की हिफाज़त कर रही है । ‘आमीन’ के प्रथम संस्करण की भूमिका शीर्ष लेखक कमलेश्वर ने लिखी जो किसी पुस्तक पर उनकी अंतिम भूमिका के रूप में याद की जाती है और मशहूर शायर-फिल्कार गुलज़ार के पेशलफ्ज़ ने इस पर एक मुकम्मल संग्रह होने की मुहर लगाई। दो भाषाओं का पुल बनाने वाले एक नौजवान के पहले संग्रह पर हिन्दी और उर्दू के दो शिखर कलमकारों के शब्द इस बात की गवाही बने कि आलोक ने अपना अदबी इम्तेहान पूरी संजीदगी और तैयारी से दिया है जो बहुत हद तक सही साबित हुई; वहीं दूसरे संस्करण की भूमिका डॉ. नामवर सिंह ने लिखी, इस शुभकामना के साथ कि ये रचनाएँ और दूर तक पहुँचें। आमीन!

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    Alok Srivastava

    आलोक श्रीवास्तव

    कविता, कहानी, फिल्म-लेखन और टीवी पत्रकारिता का जाना-माना नाम।

    शाजापुर (म.प्र.) में 30 दिसंबर को जन्म। तीन दशक से गज़लकार के रूप में प्रसिद्धि। सभी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। पहला ही गज़ल-संग्रह ‘आमीन’ सर्वाधिक चर्चित, लोकप्रिय व बहु-पुरस्कृत पुस्तकों में शामिल। ‘राजकमल’ से ही प्रकाशित ‘आफरीन’ नामक कथा-संग्रह के भी अब तक अनेक संस्करण। कई भारतीय व विदेशी भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद। उर्दू के ख्यात शायरों की पुस्तकों का संपादन। 

    हिंदी के अन्यतम युवा गज़लकार जिनकी अनेक गज़लों व नज़्मों को जगजीत सिंह, पंकज उधास, उस्ताद राशिद खान, शुभा मुद्गल व रेखा भारद्वाज से लेकर महानायक अमिताभ बच्चन तक ने अपना स्वर दिया। भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकारों व पाश्र्व गायकों ने भी कई गीतों व गज़लों को स्वरबद्ध किया।

    शब्दशिल्पी सम्मान (भोपाल), हेमंत स्मृति कविता सम्मान (मुंबई), परंपरा ऋतुराज सम्मान (दिल्ली), मध्य प्रदेश साहित्य अकादेमी का दुष्यंत कुमार पुरस्कार, फ़िराक गोरखपुरी सम्मान, (उदयपुर), मास्को (रूस) का अंतरराष्ट्रीय पुश्किन सम्मान  सहित अमेरिका के वॉशिंगटन में हिंदी गज़ल सम्मान  व कथा यूके की ओर से ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ  कॉमन्स  में सम्मानित हुए पहले युवा गज़लकार।

    अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोप, रूस, साउथ अफ्रीका और यूएई सहित 15 से अधिक देशों की साहित्यिक यात्राएँ। 

    संप्रति : टीवी पत्रकारिता और फ़िल्मों में सक्रिय लेखन।

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