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SanskrIti : Varchswa Aur Pratirodh

SanskrIti : Varchswa Aur Pratirodh

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  • Pages: 184p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126714919
  •  
    संस्कृति: वर्चस्व और प्रतिरोध भारतीय समाज और संस्कृति के उन असुविधाजनक सवालों से टकराने के क्रम में लिखी गई है, जिनसे बचने का हर सम्भव प्रयास अब तक किया जाता रहा है। संस्कृति पर अमूर्तनों की भाषा में लिखे गए तमाम पोथों से भिन्न यह पुस्तक मोहक आवरणों से ढके छद्म को उद्घाटित करती है। बढ़ता साम्प्रदायिक जश्हर, शोषण के नए तरीके, कुर्सी हथियाने के लिए धर्म का सीढ़ी की तरह किया जानेवाले इस्तेमाल, स्त्री-दमन का अनवरत सिलसिला, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ जारी होनेवाले फ़तवे, उभरते दलित आंदोलन को नाकाम करने में लगी अमानुषिक ताकतें और मानवीय संवेदनातंत्र के निरंतर छीजते जाने की प्रक्रिया - ये अब हमारे समय की कटु वास्तविकताएँ हैं। ईमानदार रचनाधर्मी मानस ने इन सभी मुद्दों को इस पुस्तक में उठाया है, सरलीकरणों से बचने की सफल कोशिश की है और इन प्रश्नों से जुड़ी प्रचलित प्रगतिशील व्याख्याओं की जाँच भी की है। सुपरिभाषित सांस्कृतिक प्रतीकों को पुरुषोत्तम अग्रवाल ने नई दृष्टि से विश्लेषित करने का प्रयास किया है। कहने की आवश्यकता नहीं कि इसी कारण यह पुस्तक हमारे परम्परागत संस्कारों, स्वीकृत मूल्यों और प्रश्नातीत बना दी गई आस्थाओं को झकझोर देने में समर्थ हो सकेगी। अपने भाषिक रचाव में यह पुस्तक विशिष्ट है। विचारगत नवीनता भाषा का नया तेवर चाहती है, जिसे डॉ. अग्रवाल ने सघन सर्जनात्मकता में अर्जित किया है। मधुर पद-बंधों के आदी हो चुके लोगों को इसमें जश्रूरी औषधीय कड़वाहट मिलेगी, साथ ही आद्यन्त कवि-सुलभ रससिक्तता भी। तथाकथित ‘जातिवाद’ के सामाजिक-राजनीतिक निहितार्थों की सर्वथा नई व्याख्या और वर्णाश्रम के सांस्कृतिक अर्थ का विचारोत्तेजक रेखांकन इस पुस्तक के तर्क की अपनी विशेषताएँ हैं। समाज, संस्कृति और सर्जनात्मकता का गतिशील परिप्रेक्ष्य विकसित करने की बौद्धिक बेचैनी से भरपूर यह किताब उन सबके लिए जश्रूरी है, जो भारतीय समाज के अंतर्निहित वर्चस्वतंत्र से जिरह करना चाहते हैं।

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    Purushottam Agrawal

    पुरुषोत्तम अग्रवाल

    पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक 'अकथ कहानी प्रेम की : कबीर की कविता और उनका समय' भक्ति-सम्बन्धी विमर्श में अनिवार्य ग्रन्थ का दर्जा हासिल कर चुकी है !

    उनकी पिछले कुछ वर्षों में प्रकाशित कहानियाँ जीवंत और विचारोत्तेजक चर्चा के केंद्र में रही हैं, जिनमे शामिल हैं, 'चेंग-चुई', 'चौराहे पर पुतला', 'पैरघंटी', 'पान पत्ते की गोठ' और 'उदासी का कोना' !

    'नकोहस' उनका पहला उपन्यास है !

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