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Madarsa

Madarsa

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  • Pages: 295p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126719815
  •  
    ‘दास्तान-ए-लापता’ और ‘सूखा बरगद’ जैसे चर्चित उपन्यासों के लेखक मंज़ूर एहतेशाम की यह नई औपन्यासिक कृति समकालीन हिन्दी उपन्यास के लय-ताल रहित परिदृश्य में एक सुखद हस्तक्षेप है। यह उपन्यास पुनः स्थापित करता है कि सिर्फ कहानी बता देना और प्रचलित विमर्शों की जुमलेबाजी का बघार डालते हुए ‘पोलिटिकली करेक्ट’ मोर्चे पर सीना तान कर खड़े हो जाना ही अच्छे उपन्यास की गारंटी नहीं है। हर उपन्यास को अपनी भाषा और संरचना में अपनी ही एक लय का आविष्कार करना पड़ता है, और यही वह चीज है जो उसे दशकों और सदियों तक पढ़नेवाले के दिलो-दिमाग़ का हिस्सा बनाती है। यह उपन्यास सफलतापूर्वक इस जिम्मेदारी को अंजाम देता है। देश और काल के विभिन्न चरणों में आवाजाही करता हुआ यह उपन्यास स्मृतियों की पगडंडियों पर जैसे चहलकदमी करते हुए, अपने पात्रों के भीतरी और बाहरी बदलावों की प्रक्रिया से गुजरता है; उन सवालों से रूबरू होता है जो समय हमारे भीतर रोपता रहता है और उन यंत्रणाओं से भी जिनकी जिम्मेदारी तय करना कभी आसान नहीं होता। किसी भी उम्दा रचना को लेकर यह कहना कभी संभव नहीं होता कि इसका उद्देश्य अमुक है, अथवा इससे हमें अमुक संदेश प्राप्त होता है। वह हमारे ही जीवन का एक ज्यादा उजले प्रकाश में बुना गया चित्र होता है जिससे हम जाने कितनी दिशाओं से रोशनी पाते हैं, और एक ज्यादा खुली और रौशन जगह में अपना नया ठिकाना बनाते हैं। ठिकानों और वक़्तों की उधेड़-बुन में रोशनी की किरचें पकड़ता हुआ यह उपन्यास पाठकों को निश्चय ही अनुभूति का एक नया धरातल देगा।

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    Manzoor Ehtesham

    जन्म: 3 अप्रैल, 1948 को भोपाल में।

    शिक्षा: स्नातक।

    इंजीनिय¯रग की अधूरी शिक्षा के बाद दवाएँ बेचीं। पिछले 25 वर्ष से फ़र्नीचर और इंटीरियर डेकोर का अपना व्यवसाय।

    प्रकाशित कृतियाँ: पहली कहानी रमज़ान में मौत 1973 में और पहला उपन्यास कुछ दिन और 1976 में प्रकाशित। उपन्यास: कुछ दिन और, सूखा बरगद, दास्तान-ए-लापता, पहर ढलते, बशारत मंज़िल; कहानी-संग्रह: तसबीह, तमाशा तथा अन्य कहानियाँ; नाटक: एक था बादशाह (सह-लेखक सत्येन कुमार)।

    सम्मान: सूखा बरगद (उपन्यास) पर श्रीकान्त वर्मा स्मृति सम्मान और भारतीय भाषा परिषद, कलकत्ता का पुरस्कार, दास्तान-ए-लापता (उपन्यास) पर वीरसिंह देव पुरस्कार, तसबीह (कथा-संग्रह) पर वागीश्वरी पुरस्कार तथा 1995 में समग्र लेखन पर पहल सम्मान, 2003 में राष्ट्रीय सम्मान ‘पद्मश्री’ से अलंकृत। निराला सृजनपीठ, भोपाल, के अध्यक्ष।

    सम्पर्क: शिल्पकार हाउस, ग्रांड होटल के सामने, भारत टॉकीज़ चौराहा, भोपाल-4620011

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