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Hindi Saray Astrakhan Vaya Yerevan

Hindi Saray Astrakhan Vaya Yerevan

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  • Pages: 131p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126723904
  •  
    ...और कई प्रमाणों की तरह अस्त्राखान के हिन्दू व्यापारी भी उस वास्तविकता के प्रमाण हैं, जिस पर ध्यान देने की जरूरत ही नहीं महसूस की जाती । वे ऐसे पात्र हैं जो सैकड़ों सालों से अपने लिए लेखक तलाश रहे हैं । वे हिन्दी सराय में बुला रहे हैं, कोई जाने को तैयार नहीं । अस्त्राखान की हिन्दी सराय की ये आवाजें, यों तो काफी पहले से सुनता रहा था, धुंधली सी यादें बनी हुई थीं । ' डिस्कवरी ऑफ इंडिया ' के अलावा, राहुल जी के ' मध्य एशिया के इतिहास ' में भी अस्त्राखान के व्यापारियों के भारत-संपर्क का उल्लेख है । ' अकथ कहानी प्रेम की ' लिखने के दौरान इन आवाजों की धुंधली यादें तो ताजा हो ही गईं, कुछ और आवाजें भी सुनाई देने लगीं । भारत के साथ- साथ अन्य सभ्यताओं के इतिहासों से भी आती हैं ऐसी आवाजें, जिन्हें औपनिवेशिक इतिहास-दृष्टि के अंधविश्वास दबाते रहे हैं । ऐसी आवाजें मुझे बुलाती रहती हैं, कभी मेक्सिको तो कभी अस्त्राखान । इन्हीं आवाजों को सुनने की उत्सुकता ने, अस्त्राखान में हिन्दी-सराय बनाने वाले, वोल्‍गा किनारे के तातार-बाजार में अपने मकानों और मकामों के अब तक दिखनेवाले निशान छोड़ जानेवाले मुलतानियों, मारवाड़ियों, सिंधियों, गुजरातियों से बात करने की बेचैनी ने ही कराया, मेरा यह सफर हिन्दी सराय- अस्त्राखान वाया येरेवान का... - इसी पुस्तक से?

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    Purushottam Agrawal

    पुरुषोत्तम अग्रवाल

    पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक 'अकथ कहानी प्रेम की : कबीर की कविता और उनका समय' भक्ति-सम्बन्धी विमर्श में अनिवार्य ग्रन्थ का दर्जा हासिल कर चुकी है !

    उनकी पिछले कुछ वर्षों में प्रकाशित कहानियाँ जीवंत और विचारोत्तेजक चर्चा के केंद्र में रही हैं, जिनमे शामिल हैं, 'चेंग-चुई', 'चौराहे पर पुतला', 'पैरघंटी', 'पान पत्ते की गोठ' और 'उदासी का कोना' !

    'नकोहस' उनका पहला उपन्यास है !

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