• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Sampooran Kahaniyan : Manjoor Ehtesham

Sampooran Kahaniyan : Manjoor Ehtesham

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 500

Special Price Rs. 450

10%

  • Pages: 331p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126724512
  •  
    मंजूर एहतेशाम हमारे समय के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार हैं । उनकी रचनाएँ किसी चमत्कार के लिए व्यग्र नहीं दिखतीं, बल्कि वे अनेक अन्तर्विरोधों और त्रासदियों के बावजूद 'चमत्कार की तरह बचे जीवन' का आख्यान रचती हैं । इस संग्रह में उनकी सभी कहानियाँ शामिल हैं । सम्पूर्णता में पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि मंजूर एहतेशाम मध्यवर्गीय भारतीय समाज के द्वन्द्वात्मक यथार्थ को उल्लेखनीय शिल्प में अभिव्यक्त करते हैं । 'तमाशा' कहानी का प्रारम्भ है, 'याद करता हूँ तो कोई किस्सा-कहानी लगता है : खुद से बहुत दूर और अविश्वसनीय-सा । यह कमाल वक्त के पास है कि असलियत को किसे-कहानी में तब्दील कर दे ।' किसी भी श्रेष्ठ रचनाकार की तरह यह कमाल मंजूर एहतेशाम के पास भी है कि वे परिचित यथार्थ के अदेखे कोनों-अंतरों को अपनी रचनाशीलता से अदूभुत कहानी में बदल देते हैं । स्थानीयता इन कहानियों का स्वभाव और व्यापक मनुष्यता इनका प्रभाव । अपनी बहुतेरी चिन्ता और चेतना के साथ मध्यवर्गीय मुस्लिम समाज मंजूर एहतेशाम की कहानियों में प्रामाणिकता के साथ प्रकट होता रहा है । कुछ इस भाँति कि इनसे विमर्श के जाने कितने सूत्र सामने आते हैं । ये कहानियाँ 'समूची सामाजिकता' का मार्ग प्रशस्त करती हैं । इन रचनाओं में शैली के रेखांकित करने योग्य प्रयोग हैं, फिर भी लक्ष्य है अनकहे सच की अधिकतम अभिव्यक्ति । सहजता इनकी सहजात विशेषता है । मंजूर एहतेशाम का कहानी-समग्र 'सम्पूर्ण कहानियाँ' समय और समाज की आन्तरिकता को समेकित रूप से हमारे लिए चमकदार बनाता है ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Manzoor Ehtesham

    जन्म: 3 अप्रैल, 1948 को भोपाल में।

    शिक्षा: स्नातक।

    इंजीनिय¯रग की अधूरी शिक्षा के बाद दवाएँ बेचीं। पिछले 25 वर्ष से फ़र्नीचर और इंटीरियर डेकोर का अपना व्यवसाय।

    प्रकाशित कृतियाँ: पहली कहानी रमज़ान में मौत 1973 में और पहला उपन्यास कुछ दिन और 1976 में प्रकाशित। उपन्यास: कुछ दिन और, सूखा बरगद, दास्तान-ए-लापता, पहर ढलते, बशारत मंज़िल; कहानी-संग्रह: तसबीह, तमाशा तथा अन्य कहानियाँ; नाटक: एक था बादशाह (सह-लेखक सत्येन कुमार)।

    सम्मान: सूखा बरगद (उपन्यास) पर श्रीकान्त वर्मा स्मृति सम्मान और भारतीय भाषा परिषद, कलकत्ता का पुरस्कार, दास्तान-ए-लापता (उपन्यास) पर वीरसिंह देव पुरस्कार, तसबीह (कथा-संग्रह) पर वागीश्वरी पुरस्कार तथा 1995 में समग्र लेखन पर पहल सम्मान, 2003 में राष्ट्रीय सम्मान ‘पद्मश्री’ से अलंकृत। निराला सृजनपीठ, भोपाल, के अध्यक्ष।

    सम्पर्क: शिल्पकार हाउस, ग्रांड होटल के सामने, भारत टॉकीज़ चौराहा, भोपाल-4620011

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144