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Pratinidhi Kahaniyan : Mridula Garg

Pratinidhi Kahaniyan : Mridula Garg

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  • Pages: 152
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126730568
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित मृदुला गर्ग का कथा संसार विविधता के अछोर तक फैला हुआ है ! उनकी कहानियाँ मनुष्य के सारे सरोकारों से गहरे तक जुडी हुई हैं ! समाज, देश, राजनीतिक माहौल, सामाजिक वर्जनाओं, पर्यावरण से लेकर मानव मन कि रेशे-रेशे पड़ताल करती नजर आती हैं ! इस संकलन कि कहानियाँ अपने इसी 'मूड' या मिजाज के साथ प्रस्तुत हुई हैं ! मृदुला गर्ग की कहानियाँ पाठक के लिए इतना 'स्पेस' देती हैं कि आप लेखक को गाइड बना तिलिस्म में नहीं उतर सकते, इसे आपको अपने अनुसार ही हल करना पड़ता है। यही कारण है कि बने-बनाए फॉरमेट या ढर्रे से, ऊबे बगैर, आप पूरी रोचकता, कौतूहल और दार्शनिक निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं। गलदश्रुता के लिए जगह न होते हुए भी आपकी आँखें कब नम हो जाएँ, यह आपके पाठकीय चौकन्ने पर निर्भर करता है। यही मृदुला गर्ग की किस्सागोई का कौशल या कमाल है, जहाँ लिजलिजी भावुकता बेशक नहीं मिलेगी, पर भावना और संवेदना की गहरी घाटियाँ मौज़ूद हैं, एक बौद्धिक विवेचन के साथ। —दिनेश द्विवेदी

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    Mridula Garg

    मृदुला गर्ग के रचना संसार में लगभग सभी गद्य विधाएँ सम्मिलित हैं। उपन्यास, कहानी, नाटक, निबन्ध, यात्रा संस्मरण, कटाक्ष आदि।
    प्रकाशित पुस्तकें
    उसके हिस्से की धूप, वंशज, चित्तकोबरा, अनित्य, मैं और मैं, कठगुलाब  और मिलजुल मन (उपन्यास)। कुल प्रकाशित कहानियाँ-90, 2003 तक प्रकाशित 8 कहानी-संग्रहों की सम्पूर्ण कहानियाँ संगति-विसंगति नाम से प्रकाशित। हाल में लिखी लम्बी कहानी वसु का कुटुम राजकमल से शीघ्र प्रकाश्य (कहानी-संग्रह)। एक और अजनबी, जादू का कालीन, साम दाम दण्ड भेद, कैद-दर-कैद (चार नाटक)। रंग-ढंग, चुकते नहीं सवाल, कुछ अटके कुछ भटके (निबन्ध-संग्रह)। मेरे साक्षात्कार, कृति और कृतिकार, संस्मरणात्मक आलोचना (यात्रा संस्मरण)। कर लेंगे सब हज़म, खेद नहीं है (व्यंग्य-संग्रह)।
    अनूदित कृतियाँ : चित्तकोबरा : 'द जिफ्लेक्टे कोबरा' नाम से जर्मन में तथा 'चित्तकोबरा' नाम से अंग्रेज़ी में प्रकाशित। कठगुलाब : 'कन्ट्री ऑफ गुड्बाइज़' नाम से अंग्रेज़ी में, 'कठगुलाब' शीर्षक से मराठी और मलयालम में और 'वुडरोज़' नाम से जापानी में प्रकाशित। अनित्य : 'अनित्य हाफवे टु नोवेह्यर' नाम से अंग्रेज़ी में और 'अनित्य' नाम से मराठी में प्रकाशित। अनेक कहानियाँ अंग्रेज़ी, जर्मन, चेक, जापानी व भारतीय भाषाओं में अनूदित।
    पुरस्कार सम्मान : अन्य अनेक पुरस्कारों के साथ कठगुलाब उपन्यास को 2004 में व्यास सम्मान और मिलजुल मन को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2013 प्राप्त।
    'कठगुलाब' दिल्ली वि.वि. के बी.ए. पाठ्यक्रम तथा अनेक विश्वविद्यालयों में स्त्री रचना/विमर्श पाठ्यक्रमों में शामिल है।

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