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Pratinidhi Kahaniyan : Gyanranjan

Pratinidhi Kahaniyan : Gyanranjan

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  • Pages: 135p
  • Year: 2018, 10th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171782413
  •  
    साठोत्तरी प्रगतिशील कथा-साहित्य में ज्ञानरंजन की कहानियों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस संग्रह में उनकी प्रायः सभी बहुचर्चित कहानियाँ शामिल हैं जो समकालीन सामाजिक जीवन की अनेकानेक विरूपताओं का खुलासा करती हैं। इस उद्देश्य तक पहुँचने के लिए ज्ञानरंजन ने अक्सर पारिवारिक कथा-फलक का चुनाव किया है, क्योंकि परिवार ही सामाजिक संबंधों की प्राथमिक इकाई है। इसके माध्यम से वे उन प्रभावों और विकृतियों को सामने लाते हैं, जो हमारे बूर्ज्वा संस्कारों की देन हैं। ये बूर्ज्वा संस्कार ही हैं कि प्रेम-जैसा मनोभाव भी हमारे समाज में या तो रहस्यमूलक बना हुआ है या भोगवाचक। ऐसी कहानियों में किशोर प्रेम-संबंधों से लेकर उनकी प्रौढ़ परिणति तक के चित्र उकेरते हुए ज्ञानरंजन अपने समय की प्रायः समूची दशा पर टिप्पणी करते हैं। मनुष्य के स्वातंत्रय पर थोपा गया नैतिक जड़वाद या उसे अराजक बना देनेवाला आधुनिकतावाद- मानव-समाज के लिए दोनों ही घातक और प्रतिगामी मूल्य हैं। वस्तुतः आर्थिक विडंबनाओं से घिरा मध्यवर्ग सामान्य जन से न जुड़कर जिन बुराइयों और भटकावों का शिकार है, ये कहानियाँ उसके विविध पहलुओं का अविस्मरणीय साक्ष्य पेश करती हैं।

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    Gyanranjan

    जन्म: 21 नवम्बर, 1936 को महाराष्ट्र के अकोला में।

    शिक्षा: बचपन और किशोरावस्था का अधिकांश समय अजमेर, दिल्ली एवं बनारस में तथा उच्च शिक्षा इलाहाबाद में सम्पन्न हुई।

    छह कहानी-संग्रह प्रकाशित।  कहानियाँ भारतीय भाषाओं तथा अनेक विदेशी भाषाओं में अनूदित। भारतीय विश्वविद्यालयों एवं ओसाका, लंदन, सेनफ्रांसिस्को, लेलिनग्राद और हाइडेलबर्ग आदि के अनेक अध्ययन केन्द्रों के पाठ्यक्रमों में कहानियाँ शामिल। साहित्य अकादमी, नेशनल बुक ट्रस्ट और एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा कहानियों का चयन, प्रकाशन और अनुवाद। लंदन पेंग्विन्स की भारतीय साहित्य की एन्थ्रुलाजी में कहानी सम्मिलित। गार्डन सी टोडरमल, चार्ल्स डेंट, अरविन्द कृष्ण मेहरोत्रा और गिरधर राठी द्वारा कहानियों के अंग्रेजी अनुवाद। अमेरिका में विलेज वायस द्वारा फिल्म निर्माण। दूरदर्शन द्वारा भी दो फिल्मों का निर्माण। देवीशंकर अवस्थी, सुरेन्द्र चौधरी, डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी, डॉ.नामवर सिंह, डॉ. विजयमोहन सिंह, नेमिचन्द्र जैन और अशोक वाजपेयी जैसे वरिष्ठ आलोचकों द्वारा ज्ञानरंजन की कहानियों पर महत्त्वपूर्ण लेखन तथा अनेक उत्कृष्ट शोध- कार्य सम्पन्न।

    सम्मान: सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान, अनिल कुमार और सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार और मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग का शिखर सम्मान। सुदीर्घ कथा साधना, सृजनशीलता और बहुआयामी कार्यनिष्ठा के लिए वर्ष 2001-2002 राष्ट्रीय ‘मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’ से सम्मानित।

    सम्प्रति: हिन्दी की प्रतिष्ठित और बहुचर्चित पत्रिका पहल के विगत 27 वर्षों से सम्पादन और प्रकाशन।

    सम्पर्क: 101, रामनगर, अधारताल, जबलपुर-482 002

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