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Teen Sau Ramayane Evam Anya Nibandh

Teen Sau Ramayane Evam Anya Nibandh

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  • Pages: 128P
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126724390
  •  
    ‘तीन सौ रामायणें एवं अन्य निबंध विवेक और विमर्श की अवहेलना करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने ए.के. रामानुजन के प्रसिद्ध आलेख ‘थ्री हंडेªड रामायणाज़: फ़ाइव एक्ज़ाम्पल्ज़ एंड थ्री थॉट्स ऑन ट्रांसलेशन’ को अक्टूबर, 2011 में अपने पाठ्य-क्रम से निरस्त कर दिया था। कुछ अवान्तर उपद्रव भी प्रकट हुए थे। इस आलेख को सर्वसुलभ बनाने एवं सम्यक् विश्लेषित करने के उद्देश्य से संजीव कुमार ने इसका हिन्दी अनुवाद किया। यह अनुवाद ‘नया पथ’ पत्रिका के एक अंक में प्रकाशित हुआ। प्रस्तुत पुस्तक के केन्द्र में यही आलेख है। पुस्तक की भूमिका के अनुसार, ‘जिन्होंने भी रामानुजन के आलेख को पढ़ा है, उन्होंने महसूस किया है कि यह शोध और विश्लेषण की गहराई का कितना नायाब नमूना है। और यह कि हिन्दू भावनाओं को आहत करना तथा रामकथा पर कोई नकारात्मक टिप्पणी करना तो दूर, यह लेख रामकथा के सांस्कृतिक महत्त्व, उसकी आश्चर्यजनक व्यापकता और अर्थगर्भत्व का - जिसके कारण उसके शताधिक रूप प्रचलित हैं - एक अद्भुत निदर्शन है। लेखक की इस गुणवत्ता का साक्षात्कार करने वाले के मुँह से आह निकलती है कि काश, हिन्दुत्व के पैरोकारों को थोड़ा पढ़ने का शऊर भी होता! यह किताब रामानुजन के आलेख को आपके सामने पेश करने के साथ-साथ खूबसूरती के ख़िलाफ़ खड़े इन लोगों की ख़बर देती और लेती भी है। यहाँ रामानुजन के अलावा कामिल बुल्के हैं, रोमिला थापर हैं, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह और प्रभात कुमार बसन्त हैं।’

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    Sanjeev Kumar

    जन्म: 10 नवम्बर, 1967, पटना।

    शिक्षा : पटना विश्वविदयालय से बी.ए. और दिल्ली विश्वविदयालय से एम्.ए., एम.फिल, पी-एचडी. | फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर |

    किताबें : जैनेन्द्र और अज्ञेय: सृजन का सैद्धान्तिक नेपथ्य (2011 के देवीशंकर अवस्थी सम्मान से सम्मानित), तीन सौ रामायणे और अन्य निबंध (सम्पादित), बालाबोधिनी (वसुधा डालमिया के साथ सह-संपादन), योगेन्द्र दत्त के साथ मिलकर वसुधा डालमिया की पुस्तक नेशनलाइजेशन ऑफ हिन्दू ट्रेडिशन : भारतेंदु हरिश्चंद्र एंड नाइन्टीन्थ सेंचुरी बनारस का हिंदी में अनुवाद-हिन्दू परम्पराओं का राष्ट्रीयकरण : भारतेंदु हरिश्चंद्र और उन्नीसवीं सदी का बनारस, तेलंगाना संग्राम पर केन्द्रित पी. सुन्दरैया की किताब के संशिप्त संस्करण का हिंदी में अनुवाद-तेलंगाना का हथियारबंद जनसंघर्ष |

    आलोचना के अलावा गाहे-बगाहे व्यंग्य, कहानी, निबंध, संस्मरण जैसी विधाओं में लेखन | 2009 से जनवादी लेखक संघ की पत्रिका नया पथ के संपादन से जुड़ाव और 2018 से राजकमल प्रकाशन की पत्रिका आलोचना के संपादन की शुरुआत |

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