• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

Khel Sirf Khel Nahin Hai

Khel Sirf Khel Nahin Hai

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 450

Special Price Rs. 405

10%

  • Pages: 352p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126716104
  •  
    ‘खेल सिर्फ खेल नहीं है’ पुस्तक में प्रभाष जोशी द्वारा खेल पर लिखे गए लेख संकलित हैं। इन लेखों से हिन्दी में खेल विश्लेषण का पूरा परिदृश्य ही बदल गया था। प्रभाष जोशी ने अपनी भूमिका में लिखा है: ”इस पुस्तक में वे लेख दिए गए हैं जो मैंने खेल पर लिखे। अब जिस तरह राजनीति पर सम्पादकीय पेज पर सम्पादकीय या मुख्य लेख या जब जरूरी हुआ, पहले पेज पर लिखता रहा। उसी तरह खेल जैसे खेले जाते रहे - पहले पेज, आखिरी पेज और सम्पादकीय पेज पर कवर करता रहा। ऐसा करते हुए जो बच जाता था या जिसके मानवीय पहलू के लिए खबर में गुंजाइश नहीं होती थी, वही कागद कारे में आया। खेल को महज एक मनोरंजन या शारीरिक व्यायाम मैं नहीं मानता। खेल मनुष्य का चरित्र बनाता है लेकिन उससे भी ज्यादा खेल में मनुष्य का चरित्र व्यक्त और प्रकट होता है। अंग्रेज माँ के केनेडियन बेटे ग्रेग रूज़ेस्की ने अमेरिकी माइकल चांग से एक मैच में एक सेट जीता, एक हारा और तीसरे सेट में चार-चार गेम पर थे। रूज़ेस्की सर्व कर रहा था तीस-तीस पर। गेम जीतने के लिए दो पाइंट और चाहिए थे। किसी तरह वह ड्यूस पर आया और फिर एडवांटेज पर। एक पाइंट के बाद गेम उसका होना था। सर्व करने के पहले रूज़ेस्की ने अपने पर क्रॉस बनाया और गेंद चूमी। तभी मुझे लगा कि गेम यह हार जाएगा। रूज़ेस्की ने सर्विस की और नेट में मार दी और फिर मार के डबन फॉल्ट कर दिया। चांग को मौका मिला और वह गेम और सेट दोनों ले गया। तब रूज़ेस्की की सर्विस गोले जैसे होती थी और उसका कैरियर बन रहा था। मैंने लिखा कि वह कभी कोई ग्रैंड स्लेम जीत नहीं पाएगा। जीता भी नहीं और अब तो खेलता भी नहीं। उस मैच के सबसे नाजुक और निर्णायक मौके पर रूज़ेस्की का अपने पर विश्वास नहीं था इसलिए उसने क्रॉस बनाया और गेंद चूमी। सबसे कठिन घड़ी में जिसका अपने पर विश्वास नहीं होता, उससे कुछ भी जीता नहीं जाएगा। मैं क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल जैसे खेल इन्हीं नाजुक और कठिन घड़ियों में खिलाड़ियों और टीमों के चरित्र समझने के लिए देखता हूँ। महज मन बहलाने के लिए नहीं। खेल सचमुच एक अनुशासन है जो मनुष्य को पूरा बनाता और प्रकट करता है।“

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Prabhash Joshi

    प्रभाष जोशी 15 जुलाई, 1937 को मध्यप्रदेश में सिहोर जिले के आष्टा गाँव में पैदा हुए। शिक्षा इंदौर के महाराजा शिवा जी राव मिडिल स्कूल और हाई स्कूल में हुई। होल्कर कॉलेज, गुजराती कॉलेज और क्रिश्चियन कॉलेज में पहले गणित और विज्ञान पढ़े। देवास के सुनवानी महाकाल में ग्राम सेवा और अध्यापन किया। पत्रकारिता को समाज परिवर्तन का माध्यम मानकर सन् 60 में ‘नई दुनिया’ में काम शुरू किया। राजेन्द्र माथुर, शरद जोशी और राहुल बारपुते के साथ काम किया। यहीं विनोबा की पहली नगर यात्रा की रिपोर्टिंग की। 1966 में शरद जोशी के साथ भोपाल से दैनिक ‘मध्यप्रदेश’ निकाला। 1968 में दिल्ली आकर राष्ट्रीय गांधी समिति में प्रकाशन की जिम्मेदारी ली। 1972 में चम्बल और बुंदेलखंड के डाकुओं के समर्पण के लिए जयप्रकाश नारायण के साथ काम किया। अहिंसा के इस प्रयोग पर अनुपम मिश्र और श्रवण कुमार गर्ग के साथ पुस्तक लिखी - चम्बल की बन्दूकें, गांधी के चरणों में। 1974 में ‘प्रजानीति’ (साप्ताहिक) और ‘आस पास’ निकाली जो इमरजेंसी में बन्द हो गई। जनवरी ’78 से अप्रैल 81 तक चंडीगढ़ में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ का सम्पादन किया। फिर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ (दिल्ली संस्करण) के दो साल तक सम्पादक रहे। सन् 83 में प्रभाष जोशी के सम्पादन में ‘जनसत्ता’ का प्रकाशन हुआ। प्रभाष जोशी की पुस्तक मसि कागद और हिन्दू होने का धर्म भी है। 5 नवम्बर, 2009 को दिल्ली में निधन हुआ।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144