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Naye JanSanchar Madhyam Aur Hindi

Naye JanSanchar Madhyam Aur Hindi

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  • Pages: 123p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126704514
  •  
    नए जन-संचार माध्यमों में हिन्दी का प्रयोग बढ़ रहा है। हर प्रक्रिया में माध्यम बदल रहे हैं, हिन्दी भी बदल रही है। नए रूप बन रहे हैं। माध्यमों में भाषा ने स्वयं एक संचार किया है। बदलती भाषा संचार की अनन्त अन्तर्क्रियाओं को जन्म दे रही है। हिन्दी के सामने नई चुनौतियाँ उपस्थित हैं और उतनी ही चुनौतियाँ माध्यमकर्मियों के सामने हैं। बी.बी.सी. ने नए जन-संचार माध्यमों में हिन्दी के स्वरूप को लेकर इसीलिए एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया। सेमिनार की सामग्री इस किताब में पाठकों के लिए उपलब्ध है। यहाँ पाठकों को पहली बार बी.बी.सी. वेबसाइट की ‘स्टाइल बुक’ का परिचय मिलेगा। मीडिया का हिन्दी शब्दकोश होना चाहिए; एक पदावली कोश भी - इस तरफ कुछ इशारे यहाँ दिए गए हैं। उम्मीद है कि यह किताब नए जन-संचार माध्यमों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

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    Sudhish Pachauri

    सुधीश पचौरी

    जन्म: 29 दिसंबर, 1948; अलीगढ़ (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए. (हिंदी, आगरा विश्वविद्यालय), पी-एच.डी. एवं पोस्ट डॉक्टोरल शोध (हिंदी, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली)

    मार्क्सवादी समीक्षक, प्रख्यात स्तंभकार, मीडिया-विशेषज्ञ, भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार से सम्मानित।

    चर्चित पुस्तकें: नई कविता का वैचारिक आधार; कविता का अंत; दूरदर्शन की भूमिका; दूरदर्शन: स्वायत्तता और स्वतंत्रता (सं.); उत्तर-आधुनिकता और उत्तर-संरचनावाद; नवसाम्राज्यवाद और संस्कृति; दूरदर्शन: दशा और दिशा; नामवर के विमर्श (सं.); दूरदर्शन: विकास से बाजार तक; उत्तर-आधुनिक साहित्यिक विमर्श; मीडिया और साहित्य; उत्तर-केदार (सं.); देरिदा का विखंडन और साहित्य; साहित्य का उत्तरकांड: कला का बाजार; टीवी टाइम्स; इक्कीसवीं सदी का पूर्वरंग; अशोक वाजपेयी पाठ-कुपाठ; प्रसार भारती और प्रसारण- परिदृश्य; साइबर-स्पेस और मीडिया; स्त्री देह के विमर्श; आलोचना से आगे; हिन्दुत्व और उत्तर-आधुनिकता; मीडिया, जनतंत्र और आतंकवाद; ब्रेक के बाद; पॉपूलर कल्चर, फासीवादी संस्कृति और सेकूलर पॉप-संस्कृति, साहित्य का उत्तर-समाजशास्त्र।

    सम्प्रति: दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर।

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