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Balabodhini

Balabodhini

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  • Pages: 352p
  • Year: 2014, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126725786
  •  
    भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रवर्तक माने जाते हैं ! खड़ी बोली हिंदी को साहित्य के माध्यम के रूप में प्रसारित-प्रचारित करने तथा रचनात्मक स्टार पर इस्तेमाल करने के लिए, साथ ही, अपने समय की बहुसंक्य प्रतिभाओं को अपने विराट मित्रमंडली में शामिल और प्रोत्साहित करने के लिए भी, उन्हें याद किया जाता है ! सुविदित है कि 1870 के दशक में उनकी प्रकाशन गतिविधियाँ बहुत तेजी से बढ़ी और वे उत्तर-पश्चिमी प्रान्तों में केंद्रीय महत्त वाली एक शख्सियत के रूप में उभरे ! उनकी दो साहित्यिक पत्रिकाएं-कविवचनसुधा (1868-85) और हरिश्चंद्र मैगज़ीन, जिसका नाम बाद में हरिश्चंद्र चन्द्रिका (1873-85) कर दिया गया-उनके जीवनकाल में ही प्रसिद्धि हासिल कर चुकी थीं ! इनके साथ-साथ 1874से 1877 तक उन्होंने महिलाओं की पत्रिका बालाबोधिनी भी सम्पादित की थी, जिसका हिंदी की पहली स्त्री-पत्रिका होने के नाते साहित्यिक इतिहास में विशिष्ट महत्त है ! पर यह एक विडंबना है कि भारतेंदु की सभी जीवनियों में अनिवार्य और सम्मानजनक नामोल्लेख के बावजूद इस पत्रिका की सामग्री, अंतर्वस्तु या ढब-ढांचे को लेकर वहां, या अन्यत्र भी, कोई विवेचन नहीं मिलाता और न ही इसकी प्रतियाँ कहीं सुलभ हैं ! विभिन स्रोतों से इकठ्ठा किए गए बालाबोधिनी के अंको को पुस्तकाकार रूप में हिंदी जगत के सामने लाना इसलिए महत्तपूर्ण है ! यह संतोष की बात है कि अब भारतेंदु पर या हिंदी प्रदेश में स्त्री-प्रश्न पर काम करने वालों के सामने इस प्रथम स्त्री-मासिक का नामोल्लेख भर करने की मजबूरी नहीं रहेगी !

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    Vasudha Dalmiya

    वसुधा डालमिया
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जर्मन साहित्य में और यूनिवर्सिटी ऑफ हाइडेलबर्ग से इंडोलॉजी तथा हिंदी साहित्य में शोध करने के बाद लंबे समय तक यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में हिंदी और साउथ एशियन स्टडीज़ की प्रोफेसर रहीं। उसके बाद येल यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ रिलीजियस स्टडीज़ के अंतर्गत चंद्रिका एंड रंजन टंडन प्रोफेसर ऑफ हिंदू स्टडीज़ के पद पर कार्य किया। 'दि नेशनलाइज़ेशन ऑफ हिंदू ट्रेडिशंस : भारतेंदु हरिश्चंद्र एंड नाइनटींथ सेंचुरी बनारस', 'पोएटिक्स, प्लेज़र एंड परफॉर्मेंसेज़ : दि पॉलिटिक्स ऑफ मॉडर्न इंडियन थियेटर', 'हिंदू पास्ट्स : वीमेन, रिलीजन, हिस्ट्रीज़' उनकी चर्चित पुस्तकें हैं। संपादित पुस्तकों की लंबी फेहरिस्त में से हाल के वर्षों की पुस्तकें हैं : 'रिलीजियस इंटरैक्शंस इन मुग़ल इंडिया', 'बालाबोधिनी' (हिंदी में), 'कैम्ब्रिज कॉम्पैनियन टु मॉर्डन इंडियन कल्चर', 'हिंदी मॉडर्निज़्म : रीथिंकिंग अज्ञेय एंड हिज़ टाइम्स' इत्यादि।

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