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Chainalon Ke Chehre

Chainalon Ke Chehre

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  • Pages: 244
  • Year: 2015, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728695
  •  
    न्यूज़ चैनलों की जब भी बात होती है तो उनके एंकर की चर्चा जरूर की जाती है ! और कैसे न हो ! एंकर किसी भी चैनल की पहचान होते हैं ! वे चैनलों के चेहरे होते हैं ! किसी भी चैनल के एंकर जिस तरह के होते हैं उसके आधार पर ही यह राय बनाई जाती है कि वह चैनल कैसा है ! अगर एंकर खूबसूरत, समझदार, चोकन्ने हैं तो उस चैनल को भी लोग उसी नजर से देखेंगे ! इसलिए कोई भी चैनल एंकर के चयन को सबसे ज्यादा महत्त देता है ! वह ऐसे चेहरों की तलाश में रहता है जो दर्शकों को बाँध सकें ! जाहिर है कि टेलीविज़न एंकरिंग एक आकर्षक एवं प्रभावशाली विधा है, पेशा है और यह बहुत स्वाभाविक है कि छात्र ही नहीं टेलीविज़न में वर्षों से काम कर रहे पत्रकार भी यह सपना पाले रहते हैं कि उन्हें भी स्क्रीन पर आने का मौका मिले ! इसलिए सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा भी एंकरिंग के लिए होती है ! चैनल चलाने वाले भी एंकर के चयन के मामले में बेहद कठोर होते हैं ! कोई भी चैनल एंकर को लेकर समझौता नहीं करना चाहता ! इसलिए एंकर बनने के इच्छुक लोगों को यह जरूर पता होना चाहिए कि उनकी राह बहुत आसन नहीं है और यह सपना कैसे पूरा हो सकता है या उसे पूरा करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए, इस पर सोचना जरूरी है ! आजकल सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि एंकरिंग के बारे में विस्तार से जानने और फिर उसे सीखने का कोई इंतजाम नहीं है ! दिल्ली, मुंबई जैसे कुछ बड़े शहरों को छोड़ दें तो कहीं ढंग के प्रशिक्षण संस्थान नहीं हैं ! जहाँ हैं, वहां सिखाने वाले खुद ही प्रशिक्षित नहीं हैं ! बड़े शहरों में भी अधिकांश प्रशिक्षण संस्थान मोटी रकम वसूलने के लिए ज्यादा कुख्यात हैं ! ऐसे में कमजोर हैसियत और छोटे तथा मझोले शहरों में रहने वाले लोग क्या करें, कहाँ जाएँ ? उन्हें तो किताबों की ही मदद से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा ! लेकिन मुश्किल यह है कि टेलीविज़न एंकरिंग पर ढंग की किताबें भी नहीं हैं ! जो हैं वे दशकों पुरानीएंकरिंग को ध्यान में रखकर लिखी गई हैं जबकि अब उसमें आमूल-चूल परिवर्तन आ चूका है ! टेलीविज़न पत्रकरिता माला के तहत चैनलों के चेहरे शीर्षक से एंकरिंग पर किताब लिखने का मकसद इस कमी को पूरा करना ही है ! कोशिश रही है कि यह किताब एंकरिंग की एक परिपक्व गाइड की भूमिका ऐडा करे ! इसलिए टेलीविज़न के मौजूदा दौर को ध्यान में रखकर और एंकरिंग के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाकर इसे तैयार किया गया है ! यह पुस्तक न केवल एंकरिंग के सम्बन्ध में जानकारी कराती है, जिससे वे खुद अपनी तैयारी को आगे बढ़ा सकें !

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    Dr. Shyam Kashyap

    जन्म: 21 नवम्बर, 1948, नवाँशहर दोआबा (पंजाब)।

    शिक्षा: एम.ए. (राजनीति विज्ञान), पी-एच.डी. (पत्रकारिता एवं जनसंचार)।

    वृत्ति: पत्रकारिता एवं विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य।

    मौलिक कृतियाँ: गेरू से लिखा हुआ नाम (कविता संग्रह), मुठभेड़, सृजन और संस्कृति, साहित्य की समस्याएँ और प्रगतिशील : ष्टिकोण तथा मार्क्स, एलिएनेशन सिद्धान्त और साहित्य (आलोचना)

    सम्पादित कृतियाँ: परसाई रचनावली (सहयोगियों के साथ मिलकर), हिन्दी की प्रगतिशील आलोचना,  हिन्दी साहित्य का इतिहास: पुनर्लेखन की समस्याएँ, हरिशंकर परसाई: संकलित रचनाएँ, डॉ. रामविलास शर्मा की ‘इतिहास और समकालीन परि: श्य’ शृंखला की चारों पुस्तकें (स्वाधीनता संग्राम: बदलते परिप्रेक्ष्य: भारतीय इतिहास और ऐतिहासिक भौतिकवाद, पश्चिमी एशिया और ऋग्वेद तथा भारतीय नवजागरण और यूरोप), रास्ता इधर है और विख्यात पत्रिका ‘पहल’ का फासीवाद-विरोधी विशेषांक।

    सम्पर्क: बी-13, दैनिक जनयुग अपार्टमेंट्स,

    वसुन्धरा एनक्लेव, दिल्ली-110096

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