• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Ghumati Nadi

Ghumati Nadi

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 350

Special Price Rs. 315

10%

  • Pages: 259p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126719303
  •  
    घूमती नदी प्रख्यात विद्वान प्रोफ़्े$सर वारिस किरमानी की आत्मकथा ‘घूमती नदी’ एक दस्तावेज़ी किताब है। किताब के पहले अध्याय को ‘ख्शुश्बु-ए-पैरहन’ का शीर्षक दिया गया है। यह नहीं मालूम कि प्रो. किरमानी ने ‘गोमती नदी’ का नाम ‘घूमती नदी’ कहाँ से लिया है। हमारे पुराने हिन्दुस्तानी साहित्य में इस नदी को गोमती नदी ही लिखा गया है। किरमानी साहब ने गोमती के किनारे हरेभरे मैदानों, खेतों और पुराने क़स्बों की आलीशान मस्जिदों और मन्दिरों का ज़िक्र बडे़ ख़ूबसूरत अन्दाज़ में किया है, और फिर उस इलाक़े के मश्हूर क़स्बे देवा शरीफ़ में अपनी पैदाइश सन् 1925 में लिखी है। इसी के साथ अवध की रंगारंग तह्ज़ीब, मेले-ठेले, त्योहारों और उत्सवों का दिलचस्प उल्लेख किया गया है। अवध का रहन-सहन, साहित्य, संस्कृति, भाषा, आपसी मेलजोल, भाईचारा, आपसी एकता और अखण्डता की जीती-जागती तस्वीरें इस किताब में विशिष्ट प्रकार से मौजूद हैं। अवधी ज़बान, हिन्दुस्तानी मान्यताओं और धार्मिक आस्थाओं की ऐसी झलकियाँ पेश की गयी हैं कि पाठक उन अनुभूतियों में खो जाता है और गुज़री हुई ज़िन्दगी की प्रतिध्वनि साफ़ सुनायी देती है। किरमानी जी के माता-पिता की मृत्यु के बाद मजबूरियों और अभावों का वर्णन भी बहुत मार्मिक है। किताब में जगह-जगह ऐतिहासिक घटनाएँ दुहरायी गयी हैं, जिससे उनके ऐतिहासिक ज्ञान का पता चलता है। जैसा कि उन्होंने देहली के सुल्तान इल्तुतमिश के बचपन का वर्णन एक फ़ार्सी किताब से उद्धृत किया है। इसी तरह औरंगज़ेब के समय की भी एक घटना उल्लिखित की है, जिससे शहंशाह के बारे में ग़लतफ़ह्मी दूर होती है। इसी के साथ वारिस साहब ने अपने पूर्वजों के बारे में एक दिलचस्प घटना लिखी है जिसके स्रोत का उल्लेख किताब में नहीं है। किताब में वारिस साहब के बचपन, उनके माता-पिता और गुरुजनों की आदतों, तौर-तरीक़ों, लिबास और व्यावहारिक रंग-ढंग का उल्लेख सामाजिक इतिहास का हिस्सा है, जिसे दस्तावेज़ी हैसियत हासिल है। किरमानी साहब की आत्मकथा जोश मलीहाबादी की ‘यादों की बारात’ से कहीं ज़ियादा साहित्यिक और दिलचस्प है, जिसे पूरी पढ़े बगै़र रखने को जी नहीं चाहता। (पुस्तक की भूमिका से)

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Varis Kirmani

    प्रोफेष्सर वारिस किरमानी का जन्म सन् 1925 में देवा शरीफ, बाराबंकी (यू.पी.) में हुआ। वह जमींदारी के ख्शातमे तक अपने वतन में खेती-किसानी और जमींदारी का काम करते रहे। इसके बाद अलीगढ़ युनिवर्सिटी में सन् 1963 से 1990 तक फ़ार्सी डिपार्टमेंट में मुलाज़िमत की और बहैसियत प्रोफ़ेसर और चेयरमैन, फ़ार्सी विभाग से रिटायर हुए।

    प्रोफ़ेसर किरमानी उर्दू जुबान के नामवर लेखक, शायर, अदीब और नक्श्क़ाद हैं। वह उन चन्द गिने-चुने उर्दू के लेखकों में हैं जिन्होंने उर्दू, फ़ार्सी और अंग्रेज़ी, तीनों भाषाओं में किताबें और मज़मून लिखे हैं। उन्होंने रूस, अमेरिका, ईरान तथा अरब और सेन्ट्रल एशिया के अदबी जलसों, सेमीनारों आदि में शिरकत की है और अमेरिका की ड्यूक युनिवर्सिटी, हारवर्ड युनिवर्सिटी और शिकागो युनिवर्सिटी में एक्सटेंशन लेक्चर दिए। उनकी अदबी खिदमात के लिए उनको भारत का राष्ट्रपति अवार्ड, साहित्य एकेडमी अवार्ड सहित एक दर्जन-भर अवार्ड मिल चुके हैं। भारत के अलावा उन्हें ईरान की हुकूमत ने भी सादी अवार्ड से सम्मानित किया है। उनकी मौजूदा किताब ‘घूमती नदी’ (आत्मकथा) को उर्दू जुबान की बेहतरीन आत्मकथाओं में शुमार किया जाता है। अब तक उनके तीन शेरी मजमुए (काव्य-संग्रह) और आठ नसरी किताबें (गद्य-पुस्तकें) छप चुकी हैं।

    प्रकाशित कृतियाँ: ना रसीदा, शाखे मर्जा, दरे दिलकुशा (काव्य), अफकारो ईशा, उर्दू शायरी के नीम वा दरीच, ग़ालिब की फारसी शायरी (आलोचना), घूमती नदी (आत्मकथा) तथा अंग्रेजी में Evalution of Ghalib’s Persian Poetry, Tradition and Rationalism in Ghalib, Dreams forgotten (Indian Contribution to Persian Poetry).

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144